सागर का ‘अजूबा’ विकास, करोड़ों की लागत से बना सर्विस रोड, लेकिन बीच सड़क पर खड़े हैं आधा दर्जन मकान
Sagar NH 44 Road: सागर के बमोरी चौराहे पर नेशनल हाईवे-44 का विकास मुसीबत बन गया है, मुआवजे के बिना सर्विस रोड के बीच मकान खड़े हुए हैं, इस वजह से 40 गांवों के लोग ढाई महीने से परेशान हो रहे हैं।
- Written By: सजल रघुवंशी
सागर का अजूबा विकास (सोर्स- सोशल मीडिया)
Sagar Bamori Chauraha Underbridge Block: मध्य प्रदेश के सागर में विकास कार्यों की तस्वीर इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। शहर से लगे बमोरी चौराहे पर बन रहा अंडरब्रिज और सर्विस रोड अब लोगों के लिए सुविधा कम और परेशानी ज्यादा बन गया है। हालत यह है कि सड़क के बीच मकान खड़े हैं।
बता दें कि, निर्माण कार्य पिछले दो से ढाई महीने से ठप पड़ा है और करीब 40 गांवों के हजारों लोग रोजाना परेशानियां झेलने को मजबूर हैं। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर करोड़ों की परियोजना शुरू करने से पहले जमीन और मुआवजे की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
विकास परियोजना बनी लोगों के लिए मुसीबत
सागर-रहली मार्ग पर बमोरी चौराहे के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर यातायात को सुगम बनाने के लिए ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण किया गया। उद्देश्य था कि लोगों को जाम और दुर्घटनाओं से राहत मिले। लेकिन अब यही परियोजना लोगों के लिए मुसीबत बनती दिखाई दे रही है। ओवरब्रिज तो तैयार हो गया, लेकिन जब सर्विस रोड बनाने की बारी आई तो उसके बीच करीब आधा दर्जन मकान आ गए। बताया जा रहा है कि मकान मालिकों को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है, जिसके चलते निर्माण कार्य पूरी तरह रुक गया है।
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पिछले दो महीने से काम बंद
स्थिति यह है कि पिछले दो महीने से ज्यादा समय से निर्माण एजेंसी का काम बंद पड़ा हुआ है। एक तरफ अधूरी सड़क और दूसरी तरफ लोगों की बढ़ती परेशानियां। सबसे ज्यादा दिक्कत उन ग्रामीणों को हो रही है जो रोजाना इस मार्ग से आवाजाही करते हैं। करीब 40 गांवों के लोग इस रास्ते पर निर्भर हैं। अब उन्हें या तो चार किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर हाईवे के जरिए ओवर ब्रिज पार करना पड़ रहा है, या फिर खेतों के कच्चे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों वाला रास्ता फिलहाल तो इस्तेमाल हो रहा है लेकिन बारिश शुरू होते ही यह मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा। ऐसे में लोगों के सामने बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। वहीं हाईवे पर गलत दिशा से या अतिरिक्त दूरी तय करके निकलना भी जोखिम भरा साबित हो रहा है। ग्रामीणों को हर समय दुर्घटना का डर सताता रहता है।
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भूमि मालिकों से बातचीत जारी- प्रशासन का दावा
प्रशासन का दावा है कि भूमि मालिकों से लगातार बातचीत चल रही है और समाधान निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ मकान मालिकों का कहना है कि उन्हें अभी तक स्पष्ट रूप से मुआवजे की जानकारी नहीं दी गई है। उनका कहना है कि सरकार उचित मुआवजा दे तो वे तुरंत जमीन और मकान खाली करने को तैयार हैं। लेकिन जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे अपनी संपत्ति नहीं छोड़ सकते।
