जबलपुर से सामने आया ट्विशा शर्मा जैसा केस, शादी के 2 महीने बाद हुई थी कविता की मौत, पोस्टमार्टम पर उठ रहे सवाल

Jabalpur Kavita Death Case: जबलपुर में मेजर डॉक्टर की पत्नी की 2 महीने बाद संदिग्ध मौत, चेन्नई के प्रोड्यूसर पिता का आरोप 2 करोड़ रूपये दहेज न मिलने पर वकील बेटी को मार डाला।
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जबलपुर में ट्विशा शर्मा जैसा केस (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
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Jabalpur Lawyer Kavita Death Case: भोपाल की ट्विशा शर्मा मौत मामले की गुत्थी अभी पूरी तरह सुलझ भी नहीं पाई है कि इसी तरह का एक और सनसनीखेज मामला जबलपुर से सामने आया है। यहां एक युवती की शादी के महज दो महीने बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतका के पिता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शादी में उन्होंने करीब 100 किलो सोना, 20 लाख रुपये मूल्य का हीरे का हार और एक लग्जरी कार दहेज में दी थी।

इसके बावजूद उनके दामाद, जो सेना में डॉक्टर हैं, और उनके परिवार की ओर से दो करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की जा रही थी। पिता का आरोप है कि दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर उनकी बेटी को प्रताड़ित किया गया और बाद में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मामले को लेकर परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

1 साल पहले हुई थी शादी

चेन्नई के फिल्म प्रोड्यूसर दक्षिणामूर्ति की इकलौती बेटी कविता पेशे से अधिवक्ता थीं। अपनी बेटी के लिए उपयुक्त जीवनसाथी की तलाश में दक्षिणामूर्ति ने रिश्तेदारों की मदद से एक डॉक्टर वर की खोज की। इसी दौरान उनका परिचय मेजर डॉक्टर ओम नागार्जुन से हुआ, जो मूल रूप से चेन्नई के निवासी हैं और उस समय जबलपुर स्थित जैक राइफल्स में पदस्थ थे।

ओम नागार्जुन की तरफ से की गई दहेज की मांग

दक्षिणामूर्ति के अनुसार, शुरुआती बातचीत के दौरान सब कुछ सामान्य और संतोषजनक प्रतीत हो रहा था। इसके बाद 2 मार्च 2025 को दोनों का विवाह संपन्न हुआ। हालांकि, उनका आरोप है कि शादी के दौरान ही ओम नागार्जुन और उनके परिवार की ओर से दहेज की मांग की गई थी। दक्षिणामूर्ति का कहना है कि बेटी की खुशहाल जिंदगी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कई मांगों को पूरा किया, लेकिन इसके बावजूद दहेज को लेकर दबाव और अपेक्षाएं बनी रहीं।

कार्डियक अरेस्ट से हुई कविता की मौत- पोस्टमार्टम रिपोर्ट

कविता की मौत के बाद हुए पोस्ट मार्टम में जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने अपनी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण कार्डियक अरेस्ट बताया और इसे प्राकृतिक मृत्यु माना। हालांकि, कविता के पिता दक्षिणामूर्ति इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें अपनी बेटी की मौत पर संदेह है, जिसके चलते उन्होंने अधिवक्ता मनीष वर्मा के साथ मामले की स्वतंत्र पड़ताल शुरू की।

अस्पताल की दूरी 10 मिनट लेकिन पहुंचने में लगे तीन घंटे- मनीष वर्मा

अधिवक्ता मनीष वर्मा ने मामले को संदिग्ध बताते हुए कहा कि ऑफिसर्स मेस से मिलिट्री अस्पताल की दूरी महज 10 मिनट की है लेकिन पुलिस को दिए गए बयान के अनुसार कविता को अस्पताल पहुंचाने में लगभग तीन घंटे का समय लगा। उनका कहना है कि यह समय अंतराल कई सवाल खड़े करता है।

मनीष वर्मा ने यह भी दावा किया कि कविता के सिर पर दो गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। उनके अनुसार, इन परिस्थितियों को देखते हुए मौत के कारणों को लेकर संदेह उत्पन्न होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की गहन और निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, क्योंकि प्रथम दृष्टया यह मामला सामान्य नहीं प्रतीत होता। उनका कहना है कि अस्पताल पहुंचाने में हुई कथित देरी और चोटों की प्रकृति की जांच से ही पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकेगी।

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