Rashmi Rawat Success Story: शादी के 10 साल बाद बनीं सूबेदार, अब गोल्ड जीतकर बनीं महिलाओं की प्रेरणा
MP Powerlifting Championship: सागर की सूबेदार रश्मि रावत ने MP पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है। शादी के 10 साल बाद पुलिस में भर्ती हुईं रश्मि आज महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं।
- Reported By: सरजू पटेल | Edited By: प्रीतेश जैन
गोल्ड मेडलिस्ट रश्मि रावत (फोटो सोर्स- नवभारत)
Rashmi Rawat Powerlifting Gold Medal: दृढ़ संकल्प, लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर सागर जिले की सूबेदार रश्मि रावत ने वह मुकाम हासिल किया है, जो हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। शादी के एक दशक बाद पुलिस सेवा में चयनित होने वाली रश्मि ने अब मध्यप्रदेश पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी उपलब्धियों में एक और अध्याय जोड़ दिया है।
पन्ना जिले में जन्मी रश्मि रावत का विवाह साल 2004 में सागर जिले के राहतगढ़ निवासी श्रीराम रावत से हुआ था। शादी के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखने और नौकरी करने का लक्ष्य तय किया। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन, पीजीडीसीए और बीएड जैसी डिग्रियां हासिल कीं। हालांकि यह सफर आसान नहीं था।
पढ़ाने के साथ-साथ सरकारी नौकरी की तैयारी की
साल 2009-10 में ससुर के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का दबाव बढ़ गया। ऐसे कठिन दौर में रश्मि ने हार मानने के बजाय परिवार का सहारा बनने का निर्णय लिया। उन्होंने एक निजी कॉलेज में अध्यापन कार्य शुरू किया और साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी भी जारी रखी।
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2014 में मिली सफलता
लगातार प्रयासों का परिणाम साल 2014 में सामने आया, जब उन्होंने पहले ही प्रयास में सूबेदार स्टेनो पद पर सफलता हासिल की। शादी के 10 साल बाद मिली इस उपलब्धि ने उनके आत्मविश्वास को नई दिशा दी। नौकरी के दौरान उन्होंने फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया और नियमित योग व दौड़ के माध्यम से खुद को शारीरिक रूप से मजबूत किया।
पावरलिफ्टिंग में आजमाया हाथ
फिटनेस के प्रति बढ़ती रुचि ने उन्हें पावरलिफ्टिंग की ओर आकर्षित किया। साल 2023 में उन्होंने जिम प्रशिक्षण शुरू किया और पहली ही प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया। इसके बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों और बेटी की पढ़ाई के कारण उन्हें कुछ समय के लिए खेल से दूरी बनानी पड़ी।
180 किलो वजन उठाकर जीता गोल्ड मेडल
करीब दो साल के अंतराल के बाद उन्होंने दोबारा अभ्यास शुरू किया और केवल तीन महीने की तैयारी में मध्यप्रदेश पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप के 57 किलोग्राम वर्ग में 180 किलोग्राम वजन उठाकर पावरलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।
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परिस्थितियों को कमजोरी नही, बल्कि ताकत बनाया
रश्मि का कहना है कि मैंने हमेशा परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया है। परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत की बदौलत यह सफलता मिली है। मेरा संदेश है कि महिलाएं अपने सपनों को कभी छोड़ें नहीं, क्योंकि मेहनत का परिणाम जरूर मिलता है।
