Worldwide Book of Records: चने की दाल पर उकेरे 12 ज्योतिर्लिंग, उज्जैन की दीक्षा कुशवाह ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
Ujjain Micro Art: उज्जैन की दीक्षा कुशवाह ने 8 मिमी की चने की दाल पर 12 ज्योतिर्लिंग उकेरकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। मात्र 22 मिनट में यह उपलब्धि हासिल कर उनका नाम वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।
- Reported By: अजय नीमा | Edited By: प्रीतेश जैन
दीक्षा कुशवाह और उनका माइक्रो आर्ट (फोटो सोर्स- नवभारत)
Deeksha Kushwaha World Record: धर्म और संस्कृति की नगरी उज्जैन की एक युवा कलाकार ने अपनी असाधारण प्रतिभा से विश्व स्तर पर पहचान बनाई है। ऋषि नगर निवासी दीक्षा कुशवाह ने माइक्रो आर्ट के क्षेत्र में अनूठा कीर्तिमान स्थापित करते हुए मात्र 8 मिलीमीटर आकार की चने की दालों पर भगवान शिव के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों की सूक्ष्म आकृतियां उकेरकर ‘वर्ल्ड वाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में अपना नाम दर्ज कराया है।
आर्ट क्लास की छात्रा दीक्षा ने यह चुनौतीपूर्ण काम केवल 22 मिनट में पूरा किया। इतनी छोटी सतह पर बारीक और स्पष्ट आकृतियां बनाना बेहद कठिन माना जाता है। इसके लिए विशेष उपकरणों, सटीक तकनीक, धैर्य और गहरी एकाग्रता की आवश्यकता होती है। दीक्षा की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे उज्जैन शहर को गौरवान्वित किया है।
बचपन से माइक्रो आर्ट में है रुचि
दीक्षा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही चित्रकला और सूक्ष्म कला में विशेष रुचि रही है। समय-समय पर उन्होंने विभिन्न कलात्मक प्रयोग किए, लेकिन इस बार कुछ अलग और यादगार करने का लक्ष्य रखा। भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था और ज्योतिर्लिंगों के धार्मिक महत्व ने उन्हें इस विषय पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया।
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महाकाल के दर्शन के बाद आया विचार
उन्होंने बताया कि केदारनाथ, बद्रीनाथ और बाबा महाकाल के दर्शन के दौरान उन्हें इस तरह की अनूठी कलाकृति बनाने का विचार आया। इसके अलावा कॉलेज में साथियों द्वारा बनाए गए विभिन्न वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने भी उनके भीतर कुछ बड़ा करने का उत्साह पैदा किया। कई दिनों की तैयारी और अभ्यास के बाद उन्होंने यह रिकॉर्ड बनाने का निर्णय लिया।
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मेहनत और लगन से बनाई वैश्विक पहचान
दीक्षा के इस वर्ल्ड रिकॉर्ड की जानकारी सामने आने के बाद कला प्रेमियों और शहरवासियों ने उन्हें बधाई दी है। उनकी सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रो आर्ट जैसी दुर्लभ कला में इस प्रकार का रिकॉर्ड बनाना असाधारण उपलब्धि है। उज्जैन की इस प्रतिभाशाली बेटी ने साबित कर दिया है कि लगन, मेहनत और रचनात्मक सोच के बल पर किसी भी क्षेत्र में वैश्विक पहचान हासिल की जा सकती है।
