कच्चे मकान में रहकर बुने पक्के सपने, रेल चलाने निकली रीवा की बेटी, संघर्षों को हराकर बनी असिस्टेंट लोको पायलट
Kalpana Prajapati Success Story: रीवा के बहुरीबांध गांव की कल्पना प्रजापति ने मां-बाप को खोने के बाद भी हार नहीं मानी और संघर्षों को पार कर रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट बनी है। वह मिसाल बन गई है।
- Reported By: अर्पित पाण्डेय | Edited By: प्रीतेश जैन
कल्पना प्रजापति (फोटो सोर्स- नवभारत)
Rewa Daughter Assistant Loco Pilot: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। इस कहावत को सच साबित किया है रीवा जिले के बहुरीबांध गांव की रहने वाली कल्पना प्रजापति ने, जिन्होंने जीवन में एक के बाद एक आई चुनौतियों को मात देकर भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट बनने का सपना साकार किया है।
कल्पना की जिंदगी शुरुआत से ही संघर्षों से भरी रही। जन्म के समय ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था। मां के स्नेह के बिना बचपन बीता, लेकिन उनके पिता ने कभी उन्हें कमजोर नहीं पड़ने दिया। सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बीच पिता ने बेटी की पढ़ाई जारी रखी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पिता की मौत ने दिया बड़ा झटका
कल्पना ने रीवा आईटीआई से वर्ष 2021-23 बैच में अपनी तकनीकी शिक्षा पूरी की। पढ़ाई पूरी होने के बाद वह अपने भविष्य को संवारने की तैयारी कर रही थीं, तभी वर्ष 2024 में एक दर्दनाक हादसे ने उनकी जिंदगी को झकझोर दिया। करंट लगने से उनके पिता की असमय मृत्यु हो गई। माता-पिता दोनों को खो देने के बाद उनके सामने जीवन का सबसे कठिन दौर आ खड़ा हुआ।
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संघर्ष को बनाया अपनी ताकत
हालांकि, कल्पना ने हार मानने के बजाय संघर्ष को अपनी ताकत बनाया। इस मुश्किल समय में उनके आईटीआई के ट्रेनिंग ऑफिसर नरेंद्र द्विवेदी ने गुरु की भूमिका निभाते हुए उनका मार्गदर्शन किया। परिवार के सदस्यों के सहयोग और गुरु के मार्गदर्शन ने उन्हें अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने का हौसला दिया।
असिस्टेंट लोको पायलट पद पर चयन
कड़ी मेहनत और लगन का परिणाम मार्च 2026 में सामने आया, जब कल्पना का चयन भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट पद पर हुआ। यह सफलता केवल एक नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प की मिसाल है।
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कल्पना बनीं मिसाल
अपनी सफलता पर भावुक कल्पना कहती हैं कि जीवन में कई कठिनाइयां आईं, लेकिन परिवार और गुरु के सहयोग ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। आज उनकी उपलब्धि पर पूरा रीवा गर्व महसूस कर रहा है। कल्पना की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।
