

India First Hydrogen Train: भारतीय रेल तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। देश में बुलेट ट्रेन के साथ हाइड्रोजन ट्रेन भी दौड़ाने की तैयारी की जा रही है। पूरी तरह शांत एवं पर्यावरण पूरक हाइड्रोजन ट्रेन भारतीय रेल यात्रियों के लिए यात्रा का नया अनुभव प्रदान करेगी। इसकी खासियत यह है कि यह पूरी तरह स्वदेशी मॉडल पर तैयार की जाएगी। देश के बड़े शहरों में चलने वाली मेट्रो की तरह होगी,परंतु यह रेल पटरी पर मेट्रो से भी ज्यादा शांत और स्पीड से चलेगी।
देश में हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के पीछे क्लीन एंड ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना है। देश की पहली जीरो एमिशन ट्रेन का ट्रायल हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच हो गया है। रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस हाइड्रोजन ट्रेन के सफल ट्रायल के साथ भारत अब जर्मनी,जापान, यूके, फ्रांस एवं चीन जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है। जहां हाइड्रोजन ट्रेन चलती है। इस ट्रेन से न ही धुआं निकलता है और न ही प्रदूषण होता है। इससे सिर्फ पानी की भाप निकलता है। यह ट्रेन पूरी तरह भारत में चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार की गई है। इसमें इस्तेमाल की गई तकनीक भी भारतीय इंजीनियरों की मेहनत का नतीजा है,जो ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देती है।
देश में सबसे लंबी 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जाएगी। यह विश्व का सबसे लंबा हाइड्रोजन ट्रेनसेट है। भारत ने 10 कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेन तैयार की है, जो दुनिया में अपनी तरह की सबसे लंबी ट्रेन है। इसमें 8 डिब्बे यात्रियों के लिए हैं। जबकि 2 डिब्बे इंजन की तरह काम करते हैं। बताया गया कि विदेशों में भी इतनी लंबी हाइड्रोजन ट्रेन पहले नहीं बनी है। इसको कम दूरी वाले छोटे शहरों के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि इस ट्रेन का इंजन भी बहुत शक्तिशाली है। इसकी क्षमता 2400 किलोवाट यानी करीब 3200 हॉर्सपावर है। दोनों पावर कार मिलकर ट्रेन को अच्छी रफ्तार और ताकत देती हैं। इससे ट्रेन भारी लोड और ज्यादा यात्रियों के साथ भी आसानी से चल सकती है.
बताया गया कि हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के लिए बिल्कुल सुरक्षित है। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल का इस्तेमाल होता है, जिससे धुआं या कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती। सिर्फ पानी की भाप निकलती है। इस ट्रेन का ट्रायल लगभग 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से किया गया। वैसे यह अधिकतम 110 किमी की रफ्तार से चल सकती है। इस ट्रेन को पहाड़ी इलाकों में पर्यटक ट्रेन के रूप में चलाया जा सकता है। हाइड्रोजन ट्रेन में एक साथ 2600 से ज्यादा यात्री सफर कर सकते हैं। सरकार ने भविष्य में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बना रही है।
स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेनें मेट्रो की तरह ऑटोमेटिक बंद दरवाजे वाली होंगी। यह ट्रेन मेट्रो जैसी होगी, हर डिब्बे में दोनों तरफ दो-दो दरवाजे होंगे। अवाजरहित इस ट्रेन में पंखे, लाइट और एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं होंगी। ट्रेन में 8 यात्री डिब्बे होंगे। नीले रंग की पहली ट्रेन को जींद से सोनीपत के बीच चलाने का प्लान है। उसके बाद धीरे धीरे देश के अन्य हिस्सों में हाईडोजन ट्रेन चलेगी। इसका किराया भी अन्य ट्रेनों की तुलना में किफायती होगा।