MP Transfer Policy 2026: अब प्रभारी मंत्रियों की हरी झंडी के बिना नहीं हिलेंगे जिला स्तर के कर्मचारी
Madhya Pradesh Voluntary Transfer Process 2026: : ऑनलाइन जारी होंगे आदेश, 20% की सीमा तय; प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी होगी अनिवार्य
- Written By: सुधीर दंडोतिया
एमपी में नई तबादला नीति, सोर्स :सोशल मीडिया
Madhya Pradesh Employee Transfer News: मध्य प्रदेश सरकार राज्य में एक नई और पारदर्शी तबादला नीति लागू करने की अंतिम तैयारी में है। इस नई नीति के तहत जिला स्तर पर होने वाले तबादलों में प्रभारी मंत्रियों की भूमिका सबसे अहम होगी।
सरकार इस बार पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने पर जोर दे रही है। तैयारी यह है कि सभी तबादला आदेश ऑनलाइन जारी किए जाएं,
मंत्रियो की भूमिका अहम
नई नीति के तहत जिलों में तबादलों में प्रभारी मंत्रियों की भूमिका अहम रहने वाली है। जिला स्तर पर कोई भी स्थानांतरण सूची प्रभारी मंत्री की सहमति के बिना जारी नहीं होगी। वहीं विभागीय तबादले संबंधित विभागों के मंत्रियों के माध्यम से किए जाएंगे। सरकार की तैयारी है कि इस बार सभी तबादला आदेश ऑनलाइन जारी किए जाएं। हर संवर्ग में अधिकतम 20 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकेंगे। प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादले मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही होंगे।
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इन्हे मिलेगी प्राथमिकता
सूत्रों के मुताबिक गंभीर बीमारी, प्रशासनिक आवश्यकता, स्वेच्छा और अन्य विशेष परिस्थितियों के आधार पर तबादलों को प्राथमिकता दी जाएगी। विधायकों की अनुशंसाओं को भी महत्व मिल सकता है। बताया जा रहा है कि आज हुई कैबिनेट बैठक में तबादलों से रोक हटाने का प्रस्ताव नहीं आ सका, लेकिन अगले कुछ दिनों में नीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
ऑनलाइन व्यवस्था से आएगी पारदर्शिता
सरकार इस बार पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने पर जोर दे रही है। तैयारी यह है कि सभी तबादला आदेश ऑनलाइन जारी किए जाएं, ताकि पिछली बार की तरह सूचियों के जिलों में अटकने या देरी होने की समस्या न आए।
नई नीति के मुख्य बिंदु
तबादलों की सीमा: प्रत्येक संवर्ग (Cadre) में अधिकतम 20 प्रतिशत कर्मचारियों का ही स्थानांतरण किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री का अनुमोदन: प्रथम श्रेणी (Class-1) के अधिकारियों के तबादले केवल मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद ही संभव होंगे।
किसे मिलेगी प्राथमिकता: गंभीर बीमारी, प्रशासनिक आवश्यकता, स्वयं की इच्छा (स्वेच्छा) और विशेष परिस्थितियों को तबादलों में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा विधायकों की अनुशंसाओं को भी विचार में लिया जा सकता है।
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पिछले साल के आंकड़े और चुनौतियां
अगर पिछले वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में तबादलों के लिए करीब डेढ़ लाख आवेदन आए थे, जबकि लगभग 60 हजार तबादलों का अनुमान लगाया गया था। राज्य में कुल 6.06 लाख नियमित कर्मचारियों में से करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों के तबादले प्रस्तावित थे। सबसे ज्यादा आवेदन राजस्व, स्वास्थ्य और स्कूल शिक्षा विभाग में आए थे। स्कूल शिक्षा विभाग में ही करीब 11 हजार तबादले हुए थे, जबकि 35 हजार आवेदन स्वैच्छिक तबादलों के लिए प्राप्त हुए थे। पिछली बार भोपाल से अनुमोदित कई सूचियां जिलों में अटक गई थीं और तीसरी-चौथी सूची जारी नहीं हो पाई थी। ऐसे में इस बार सरकार नई व्यवस्था के जरिए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की तैयारी में है।
