MP विधानसभा में नारी शक्ति वंदन संकल्प पारित, सदन में गरजे CM मोहन यादव, बोले- कांग्रेस महिला विरोधी
MP Nari Shakti Vandan Resolution: मध्य प्रदेश विधानसभा में नारी शक्ति वंदन संकल्प पारित हुआ। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते हुए उसे विकास और महिला विरोधी बताया।
- Written By: अक्षय साहू
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (फाइल फोटो, सोर्स- सोशल मीडिया)
Mohan Yadav on Women’s Reservation Bill: मध्य प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में सोमवार को “नारी शक्ति वंदन संकल्प” पर लगभग आठ घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विपक्ष, खासतौर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज नारी सशक्तीकरण केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक आवश्यकता बन चुका है। इसके बावजूद कांग्रेस अपनी नकारात्मक राजनीति के कारण देश को पीछे ले जाने का प्रयास कर रही है और धर्म के आधार पर आरक्षण की मांग कर रही है, जिसे जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” को इस सदी का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस कानून के माध्यम से लोकसभा और सभी विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, जिससे उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी का अधिकार प्राप्त होगा। उनके अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अपने राजनीतिक हितों के चलते इस ऐतिहासिक पहल का विरोध किया।
देश के विकास की गति को बाधित कर रहा विपक्ष
डॉ. यादव ने कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो पार्टी पहले तीन तलाक जैसी कुप्रथा के समर्थन में खड़ी थी, वह आज महिलाओं के सशक्तीकरण की बात कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष विकास की गति को बाधित कर देश में अस्थिरता और अराजकता का माहौल बनाना चाहता है, ताकि ऐसे बड़े सुधारों से ध्यान भटकाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार का उद्देश्य केवल राजनीति करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है, और महिलाओं की भागीदारी को अब कोई नहीं रोक सकता।
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सत्र के दौरान इस विषय पर एक महत्वपूर्ण संकल्प भी पारित किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत इस संकल्प में संसद और सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को परिसीमन प्रक्रिया पूरी होते ही तुरंत लागू करने की मांग की गई। इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर केंद्र सरकार को भेजने का निर्णय लिया गया। इससे पहले कांग्रेस ने वर्तमान लोकसभा सदस्य संख्या के आधार पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव रखा था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।
महिलाओं को आरक्षण के खिलाफ है कांग्रेस
बहस के दौरान भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में नहीं है और हमेशा इसमें बाधाएं खड़ी करती रही है। उनका कहना था कि जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संशोधन विधेयक पेश किया गया, तब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने उसका विरोध किया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस को “महिला विरोधी” बताते हुए कहा कि यह पार्टी ऐतिहासिक रूप से महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की नीतियों के कारण ही लंबे समय तक महिला आरक्षण लागू नहीं हो सका। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि संशोधन विधेयक पारित हो जाता, तो लोकसभा और मध्य प्रदेश विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी कहीं अधिक बढ़ जाती।
कांग्रेस ने आरोपों पर किया पलटवार
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है और इसे परिसीमन व जनगणना के नाम पर टाल रही है। उन्होंने मांग की कि वर्तमान लोकसभा संरचना के आधार पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जाए।
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इस तरह विधानसभा में हुई लंबी बहस ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच गहरे मतभेद को उजागर कर दिया। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक सुधार बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति मान रहा है। बावजूद इसके, यह मुद्दा आने वाले समय में देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।
