क्या है रूल-66, जिसके जाल में फंसी मोदी सरकार? संसद में वोटिंग से पहले ही लागू किया पुराना महिला आरक्षण कानून

Women Reservation Act: महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) देश में लागू। 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी होने की अधिसूचना जारी। आज शाम 4 बजे लोकसभा में संशोधन विधेयक पर होगी ऐतिहासिक वोटिंग।
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PM मोदी , अमित शाह
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Women Reservation Act Implemented: महिला आरक्षण संशोधन विधेयक और परिसीमन बिल को लेकर संसद में बहस जारी है। लोकसभा में शुक्रवार शाम चार बजे ‘संशोधन विधेयक’ पर वोटिंग प्रस्तावित है। इसी बीच बहस के दौरान सरकार ने देर रात एक अहम फैसला लेते हुए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने वाले ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023 को लागू कर दिया।

केंद्रीय कानून मंत्रालय ने इस अधिनियम को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है। हालांकि यह सवाल बना हुआ है कि जब संसद में इस कानून में संशोधन कर इसे 2029 से लागू करने पर चर्चा चल रही है, तो इसे अभी से प्रभावी क्यों किया गया।

क्या हैं इसके मायने?

सरकार का यह कदम पहली नजर में भ्रम पैदा करता है, क्योंकि एक तरफ संशोधन विधेयक पर बहस जारी है और दूसरी तरफ मूल कानून को लागू करने की तारीख घोषित कर दी गई है। ऐसे में इसके राजनीतिक और कानूनी मायनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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महिला आरक्षण कानून पर अधिसूचना

सरकार ने 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को अब औपचारिक रूप से लागू कर दिया है। अधिसूचना में कहा गया है कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद भी कोई कानून तब तक लागू नहीं माना जाता, जब तक सरकार उसे राजपत्र (गजट) में अधिसूचित न कर दे। इस अधिसूचना के बाद अब यह कानून औपचारिक रूप से लागू हो चुका है।

राजनीतिक रणनीति का हिस्सा?

विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम एक रणनीतिक निर्णय हो सकता है। अगर संशोधन विधेयक संसद से पारित नहीं होता, तो भी मूल कानून प्रभावी बना रहेगा। यानी सरकार ने एक तरह से बैकअप विकल्प तैयार रखा है।

तीन संशोधन विधेयक एक साथ

सरकार ने इस मुद्दे पर तीन अलग-अलग संशोधन विधेयक पेश किए हैं—

  • केंद्र शासित प्रदेशों में 33% आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव
  • संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, जिसमें जनसंख्या की नई परिभाषा और सीटों की संख्या बढ़ाने की बात
  • परिसीमन विधेयक, जिसमें लोकसभा और विधानसभाओं की सीटें बढ़ाने का प्रावधान

इन तीनों को रूल 66 के तहत एक साथ जोड़ा गया है, यानी अब इन पर अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही प्रस्ताव के रूप में वोटिंग होगी। सांसदों को या तो तीनों का समर्थन करना होगा या सभी का विरोध।

विपक्ष ने बोला हमला

विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम सरकार की इस आशंका को दर्शाता है कि संशोधन विधेयक को जरूरी बहुमत नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस सांसदों ने इसे “कानून को बचाने की कोशिश” बताया है।

संख्या बल का गणित

संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। लोकसभा में कुल 540 सदस्य हैं (कुछ सीटें खाली हैं), ऐसे में करीब 360 वोटों की जरूरत होगी। एनडीए के पास फिलहाल यह संख्या पूरी नहीं है, जिससे सरकार के लिए चुनौती बढ़ जाती है।

कुल मिलाकर, सरकार ने एक तरफ संशोधन विधेयकों को आगे बढ़ाया है, वहीं दूसरी तरफ मूल कानून को लागू कर उसे सुरक्षित रखने की रणनीति भी अपनाई है। अब नजरें लोकसभा में होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जहां इस पूरे मुद्दे की दिशा तय होगी।

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