अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (सोर्स:- सोशल मीडिया)
भोपाल: मध्य प्रदेश और नेचर का रिलेशन काफी गहरा और खास है। इसे पहले से ही झीलों का शहर कहा जाता है। इसके अलावा यहां 10 राष्ट्रीय उद्यान और 25 वन्यजीव अभ्यारण भी है। कुल मिलाकर इस राज्य में प्रकृति और आम जीवन का एक खास मिश्रण देखने को मिलता है।
एक बार फिर मध्य प्रदेश ने अपने टाइगर स्टेट के टैग को बरकरार रखा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक इस साल भी भारत में सबसे ज्यादा बाघों की संख्या मध्य प्रदेश में है।
मध्य प्रदेश में 800 से ज्यादा बाघों के होने का दावा किया जा रहा है। बाघ को मध्य प्रदेश की आबोहवा खूब रास आ रही है, जिससे उनकी आबादी देश में सबसे ज्यादा मध्य प्रदेश में रिकॉर्ड हुई है। 29 जुलाई 2023 को इंटरनेशनल टाइगर डे पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से राज्यवार बाघों की गणना के आंकड़े जारी किए गए थे। उत्तराखंड के कॉर्बेट नेशनल पार्क में ग्लोबल टाइगर डे कार्यक्रम में साल 2022 की गणना ये आंकड़े जारी किए गए थे। इसमें एमपी को लगातार दूसरी बार टाइगर स्टेट का दर्जा मिला।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सबसे पहले 2006 में टाइगर स्टेट बना था। इसके बाद अब लगातार दो बार से मध्य प्रदेश को यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल हो रही है। वैसे, यह तीसरी बार है, जब मध्य प्रदेश को टाइगर स्टेट होने का गौरव मिला है। साल 2022 की गणना में मध्य प्रदेश के छह नेशनल पार्क सहित राज्य में 785 टाइगर पाए गए।
4 साल पहले साल 2018 में हुई गणना में भी मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा 526 टाइगर थे। चार सालों में 259 टाइगर का इजाफा हो गया है।साल 2022 की गणना में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में सबसे ज्यादा 165 टाइगर थे।दूसरे नंबर पर कान्हा नेशनल पार्क में 129 टाइगर है।जनगणना में पेंच में 123,पन्ना में 64,सतपुड़ा में 62 और संजय गांधी नेशनल पार्क दुबरी में 20 टाइगर काउंट किये गए हैं।
इसी तरह साल 2023 में मध्य प्रदेश के कान्हा नेशनल पार्क और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को मैनेजमेंट इफेक्टिवनेस इवैल्यूशन में देश के टॉप 5 टाइगर रिजर्व में जगह मिली। माना जा रहा है कि मध्यप्रदेश में टाइगर की आबादी बढ़ने से पर्यटकों की आमद भी लगातार बढ़ रही है।टाइगर स्टेट का दर्जा रखने वाले मध्य प्रदेश में इस कुल 7 टाइगर रिजर्व हैं। जहां बड़ी संख्या में पर्यटक बाघ सहित अन्य जंगली जानवर देखने आते है।