खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में घर वापसी: आजाद पठान ने अपनाया सनातन धर्म, अजय कश्यप रखा नया नाम
Mahadevgarh Temple Khandwa: खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में आजाद पठान ने सनातन धर्म अपनाकर अपना नाम अजय कश्यप रखा। वैदिक रीति-रिवाजों के साथ घर वापसी का आयोजन किया गया।
- Reported By: नितिन झवर | Edited By: प्रीतेश जैन
घर वापसी करने वाला युवक (फोटो सोर्स- नवभारत)
Khandwa Ghar Wapsi : खंडवा शहर के प्राचीन महादेवगढ़ मंदिर में बुधवार को आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में आजाद पठान नामक युवक ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ सनातन धर्म को अपनाते हुए अपना नया नाम अजय कश्यप रखा। धार्मिक अनुष्ठानों और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और हिंदू संगठन के सदस्य मौजूद रहे।
मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक विधि-विधान से हुई। आयोजकों के अनुसार वैदिक परंपरा के तहत विभिन्न संस्कार और अनुष्ठान कराए गए। इसके बाद यज्ञ, स्नान, पूजन और भगवान शिव की आरती संपन्न कराई गई। सभी धार्मिक प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद युवक ने सनातन धर्म में प्रवेश की घोषणा करते हुए अपना नाम अजय कश्यप रखा।
अजय कश्यप रखा नया नाम
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अजय कश्यप का स्वागत किया और उनके नए जीवन की शुभकामनाएं दीं। आयोजन में कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। मंदिर परिसर में पूरे समय धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा।
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कठिन परिस्थितियों में शरीफ पठान से हुई शादी
महादेवगढ़ मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल ने इस अवसर पर युवक के पारिवारिक जीवन से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अजय की मां रानी ने जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। आर्थिक अभाव के दौर में उन्होंने मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण किया। बाद में उनका शादी शरीफ पठान से हुआ, जिससे उनके दो बच्चे हुए।
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बेटी की हिंदू परिवार में हुई शादी
पालीवाल के अनुसार पारिवारिक परिस्थितियों और लंबे संघर्ष के बाद रानी ने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अलग निर्णय लिया। बताया जा रहा है कि करीब 6 साल पहले उनका तलाक हो गया था। उनकी बेटी का विवाह पहले ही एक हिंदू परिवार में हो चुका है। अब उनकी इच्छा के अनुरूप उनके बेटे ने भी सनातन धर्म अपनाते हुए घर वापसी की है। कार्यक्रम के समापन पर यज्ञ, आरती और प्रसाद वितरण किया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
