मध्य प्रदेश में यूसीसी के लिव-इन प्रावधानों पर बढ़ा विवाद, राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने जताई आपत्ति

UCC Controversy: मध्य प्रदेश में UCC के प्रस्तावित लिव-इन रिलेशनशिप प्रावधानों को लेकर राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। रजिस्ट्रेशन, भरण-पोषण और विरासत अधिकारों पर बहस तेज हो गई है।
UCC Live In Relationship Rules
कॉन्सेप्ट इमेज (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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UCC Live In Relationship Rules: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। खासतौर पर प्रस्तावित ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों ने राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक प्रतिनिधियों के बीच नई चर्चा छेड़ दी है। सरकार की ओर से लिव-इन संबंधों को कानूनी दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है, जबकि कई संगठनों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है।

प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीयन अनिवार्य किया जा सकता है। इसके तहत यदि संबंध टूटता है तो महिला और उस रिश्ते से जन्मे बच्चों के लिए भरण-पोषण का कानूनी अधिकार सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही ऐसे बच्चों को विरासत में वही अधिकार मिलने का प्रस्ताव है, जो वैध विवाह से जन्मे बच्चों को प्राप्त होते हैं। सरकार का मानना है कि इससे शादी का झांसा देकर संबंध बनाने और बाद में विवाद खड़े होने जैसे मामलों में कमी आ सकती है।

राजनीतिक पार्टियों ने बैठक में नहीं लिया हिस्सा

मध्य प्रदेश में यूसीसी पर सुझाव लेने के लिए आयोजित बैठक में कई राजनीतिक दलों ने हिस्सा नहीं लिया। कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी ने बैठक का बहिष्कार किया। वहीं समाजवादी पार्टी ने दावा किया कि उन्हें बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए। वामपंथी दलों ने भी प्रस्तावित प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि देश इस समय बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे में सरकार को प्राथमिकता के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।

मुस्लिम संगठनों ने भी जताई आपत्ति

मुस्लिम धार्मिक संगठनों ने भी यूसीसी के कुछ प्रस्तावों पर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि यह पर्सनल लॉ से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप जैसा प्रतीत होता है। धार्मिक प्रतिनिधियों ने सरकार से सभी पक्षों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ने की अपील की है।

भाजपा से जुड़े प्रतिनिधियों ने दिए कई सुझाव

वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने बैठक में यूसीसी के समर्थन में कई सुझाव दिए। इनमें विवाह के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने को दंडनीय अपराध बनाने, एनआरआई विवाहों का स्थानीय स्तर पर अनिवार्य पंजीयन करने तथा माता-पिता की देखभाल नहीं करने वाली संतानों के विरासत संबंधी अधिकारों पर कानूनी प्रावधान बनाने जैसे सुझाव शामिल हैं।

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