‘आरोप लगाने वालों के मुंह पर करारा तमाचा…’ फर्जी जाति प्रमाण पत्र में मिली क्लीन चिट पर बोली प्रतिमा बागरी
Pratima Bagri Statement: जाति विवाद में क्लीन चिट मिलने पर भड़कीं राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, कहा- '110 साल पुराने सबूतों के आगे आरोप लगाने वालों के मुंह पर करारा तमाचा'।
- Reported By: दीपक ताम्रकार | Edited By: सजल रघुवंशी
प्रतिमा बागरी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Pratima Bagri Fake Caste Certificate Case: मध्य प्रदेश की राज्यमंत्री व डिंडोरी जिले की प्रभारी मंत्री प्रतिमा बागरी जिले के सांदीपनी विद्यालय नरिया के उद्घाटन करने पहुंची थी। इस दौरान अपनी जाति प्रमाण पत्र को लेकर छानबीन समिति द्वारा क्लीन चिट मिलने पर प्रतिमा बागरी ने कहा कि समिति अपनी छानबीन करी और मैने अपने तथ्यों को रखा हैं। लगभग 110 वर्ष पूर्व मैने अपनी जाति के प्रमाण रखे थे तो मैंने अपनी तरफ से साक्ष्य रखे थे तो छानबीन समिति ने पुष्टि की है और उसको सही पाया है।
आरोप लगाने वालों के मुंह पर करारा तमाचा- प्रतिमा बागरी
आरोप लगाने वालों के लिए प्रतिमा बागरी ने कहा कि यह उनके मुंह में करारा तमाचा हैं, करारी शिकस्त हुई हैं। उन्होंने जो आरोप लगाया था उस आरोप को वो सिद्ध नहीं कर पाए। निश्चित तौर पर उनके लिए यह बहुत बड़ी पराजय है, इससे उनकी छवि ही धूमिल हुई है कि झूठा आरोप लगाकर के जो मंत्री पद पर है, एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि जो एससी वर्ग से आती हैं उसकी छवि धूमिल करने के लिए कृत्य किया था।
कांग्रेस ने की थी प्रतिमा बागरी की शिकायत
दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस अनुसूचित विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से नहीं, बल्कि राजपूत समाज (सामान्य वर्ग) से संबंध रखती हैं। शिकायत में दावा किया गया कि उन्होंने अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और निर्वाचित हुईं। इस शिकायत के आधार पर गठित छानबीन समिति ने 6 जुलाई को मंत्रालय में मामले की सुनवाई की।
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प्रतिमा बागरी ने समिति के सामने प्रस्तुत किए दस्तावेज
सुनवाई के दौरान राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी ने स्वयं को अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग का बताते हुए समिति के समक्ष कई दस्तावेज प्रस्तुत किए, जबकि कुछ आरोपों का मौखिक रूप से खंडन भी किया। उन्होंने करीब 110 वर्ष पुराने खसरा-खतौनी के रिकॉर्ड की प्रति पेश करते हुए दावा किया कि उसमें कहीं भी बागरी समुदाय को राजपूत नहीं बताया गया है और न ही किसी उपजाति का उल्लेख है।
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प्रतिमा बागरी ने यह भी तर्क दिया कि केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों से बागरी समाज के उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारती रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पन्ना जिले की अनुसूचित जाति आरक्षित गुनौर विधानसभा सीट से कांग्रेस ने महेंद्र बागरी और काशी बागरी को प्रत्याशी बनाया था। इसके अलावा, सतना जिले की अनुसूचित जाति आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट, जहां से वह वर्तमान में विधायक हैं, वहां से उनके दादा जुगल किशोर बागरी भी विधायक रह चुके हैं।
