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Bhojshala Dispute : लंदन के संग्रहालय में कैद है माँ वाग्देवी,कोर्ट के फैसले के बाद भारत लाने आस होगी पूरी
Vagdevi Statue London: 1000 साल पुराने इस विद्या केंद्र का गौरवशाली अतीत, आक्रमणों का दंश और लंदन में कैद वाग्देवी की प्रतीक्षा की पूरी कहानी।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया

लंदन के संग्रहालय में कैद है माँ वाग्देवी, सोर्स सोशल
Bhojshala Dhar History: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा और स्थापत्य कला का एक अनूठा संगम है। 11वीं सदी के महान विद्वान राजा भोज द्वारा निर्मित यह ‘महाविद्यालय’ कभी दुनिया भर के विद्यार्थियों के लिए ज्ञान का कुंभ हुआ करता था। आज यह स्थान अपने गौरवशाली इतिहास और सदियों से चले आ रहे विवादों के कारण फिर चर्चा के केंद्र में है।
अंग्रेजी शासनकाल में भी शोजशाला पर अत्याचार हुए। 1703 में मालवा पर मराठों का अधिकार हुआ। ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1826 में मालवा पर अधिकार कर लिया। अंग्रेजों ने भी मंदिर पर आक्रमण किया। लॉर्ड कर्जन ने भोजशाला से देवी की मूर्ति को लेकर 1902 में इंग्लैंड में भेज दी।
शिक्षा का वैश्विक केंद्र: जहाँ सिखाया जाता था विमान और यंत्र विज्ञान
राजा भोज स्वयं साहित्य और शिक्षा के महान संरक्षक थे। उन्होंने 1034 ईस्वी में एक भव्य पाठशाला का निर्माण कराया, जिसे ‘सरस्वती सदन’ कहा जाता था। इतिहासकार बताते हैं कि यह उस समय का ऐसा विश्वविद्यालय था जहाँ न केवल व्याकरण, आयुर्वेद और ज्योतिष, बल्कि वायुयान (Aviation), जलयान और स्वचालित यंत्रों (Robotics/Automata) जैसे अत्याधुनिक विषयों पर शोध और अध्ययन होता था। देश-विदेश से हजारों विद्वान यहाँ दर्शन और राजनीति का पाठ पढ़ने आते थे।
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आक्रमण और संघर्ष का लंबा कालक्रम
भोजशाला का इतिहास संघर्षों की लंबी दास्तान समेटे हुए है।
- खिलजी काल: 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण से इसके विनाश की शुरुआत हुई। बाद में 1401 और 1514 में दिलावर खां और महमूद शाह खिलजी के शासनकाल में परिसर के भीतर निर्माण कार्य कराए गए, जिससे इसकी मूल पहचान को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
- मराठा और क्षत्रिय राजाओं का प्रतिरोध: 1552 में क्षत्रिय राजा मेदनी राय ने हिंदू सैनिकों को संगठित कर महमूद खिलजी को यहाँ से खदेड़ दिया था। बाद में 1703 में इस क्षेत्र पर मराठों का अधिकार हुआ, जिससे हिंदू गौरव की पुनर्स्थापना हुई।
लंदन के संग्रहालय में कैद है माँ वाग्देवी
भोजशाला के इतिहास का एक दुखद अध्याय अंग्रेजी शासनकाल में लिखा गया। 1902 में लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल के दौरान, मंदिर की मुख्य अधिष्ठात्री देवी (माँ सरस्वती/वाग्देवी) की प्रतिमा को भारत से ले जाकर इंग्लैंड भेज दिया गया। वर्तमान में यह बहुमूल्य प्रतिमा ब्रिटिश म्यूजियम, लंदन में रखी हुई है, जिसे वापस लाने की मांग दशकों से की जा रही है।
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आज की स्थिति- आस्था और पुरातात्विक महत्व
वर्तमान में भोजशाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में है। इसके स्तंभों पर आज भी संस्कृत के श्लोक और व्याकरण के सूत्र खुदे हुए हैं, जो इसकी पहचान एक प्राचीन विश्वविद्यालय के रूप में स्पष्ट करते हैं। यह स्थान आज भी लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है, जो यहाँ माँ सरस्वती के प्राकट्य और राजा भोज की विरासत को नमन करने पहुँचते हैं।
History of bhojshala dhar raja bhoj saraswati temple
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