MP में नल-जल योजना के पानी का दुरुपयोग अब पड़ेगा महंगा; 500 रुपये तक का जुर्माना और कनेक्शन काटने का प्रावधान
Nal Jal Yojana MP: नल-जल योजना के नए नियम 2026 लागू, पानी की बर्बादी और टुल्लू पंप लगाने पर ₹500 तक जुर्माना, 3 महीने बिल न देने पर कटेगा कनेक्शन, पोर्टल पर अपलोड होगा पूरा ब्यौरा।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: सजल रघुवंशी
नल जल योजना के नए नियम (सोर्स- सोशल मीडिया)
Nal Jal Yojana New Rule: मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पीने के पानी की बर्बादी को रोकने और जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। सरकार ने ‘मध्य प्रदेश पंचायत ग्रामीण नल-जल योजना संचालन, संधारण एवं प्रबंधन नियम-2026’ अधिसूचित कर दिए हैं, जिसके तहत पानी के दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए दंडात्मक प्रावधान लागू किए गए हैं।
पानी के गलत इस्तेमाल पर लगेगा जुर्माना
नए नियमों के अनुसार, यदि कोई भी व्यक्ति पीने के पानी का गलत इस्तेमाल करता है, तो उस पर 100 से 500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। दुरुपयोग की श्रेणी में निम्नलिखित गतिविधियों को शामिल किया गया है, इसके अलावा अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई उपभोक्ता बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसका नल कनेक्शन स्थायी रूप से काट दिया जाएगा।
- गाय-भैंस को नहलाना, गाड़ी धोना।
- खेती के काम में पीने के पानी का उपयोग करना।
- नल में सीधे टुल्लू पंप (मोटर) लगाकर पानी खींचना।
यह है जलकर और नए कनेक्शन का शुल्क
नियमों के तहत जलकर की वसूली को व्यवस्थित किया गया है:
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- मासिक जलकर: ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन धारकों को हर महीने 100 से 120 रुपये का भुगतान करना होगा।
- नया कनेक्शन: घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक कनेक्शन के लिए 1,000 से 10,000 रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।
भुगतान में देरी पर कार्रवाई
जलकर समय पर जमा न करने पर बकाया राशि पर 5 से 10 फीसदी तक जुर्माना लगाया जाएगा। यदि कोई उपभोक्ता लगातार तीन महीने तक जलकर जमा नहीं करता है, तो ग्राम पंचायत उसका कनेक्शन बंद कर सकती है। हालांकि, पानी समिति को विशेष परिस्थितियों में जुर्माने को कम करने या माफ करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, अति गरीब, दिव्यांग, विधवा और परित्यक्त महिलाओं को जलकर से राहत देने का प्रावधान भी रखा गया है।
पारदर्शी होगी जलकर वसूली
पंचायतें अब जलकर वसूली को व्यवस्थित करने के लिए इसे ठेके पर भी दे सकेंगी। हर महीने की 10 तारीख तक वसूली का विवरण पंचायत पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। योजना के संचालन के लिए पंचायतें अपने मौजूदा बैंक खातों का ही उपयोग करेंगी, जिससे बिजली बिल, पाइप लाइन की मरम्मत और पंप संचालन जैसे खर्चों का प्रबंधन किया जाएगा।
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पाइप के आकार के लिए मानक
नए कनेक्शन देते समय पाइप के व्यास (डायमीटर) की सीमा तय की गई है। जिसके तहत घरेलू कनेक्शन के पाइप का व्यास 15 मिमी, सार्वजनिक संस्थान का 20 मिमी और व्यावसायिक/औद्योगिक का 25 मिमी तय किया गया है। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण और प्रबंधन में बड़ी मदद मिलेगी।
