घर से भागी बेटी को वापस लाने मां ने रची साजिश, छोटी बेटी के जरिए अपहरण की दर्ज कराई झूठी शिकायत, ऐसे खुला राज
Jabalpur Police Investigation : जबलपुर में घर से भागी बेटी को वापस लाने के लिए मां ने कथित तौर पर अपहरण की झूठी शिकायत दर्ज कराई। डीजीपी के निर्देश पर हुई जांच में पूरा मामला फर्जी निकला।
- Reported By: पवन पटेल | Edited By: प्रीतेश जैन
फर्जी निकला मां द्वारा बेटी के अपहरण का आरोप (फोटो सोर्स- नवभारत)
Jabalpur Fake Kidnapping Complaint: जबलपुर में पुलिस को गुमराह करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। युवती के अपहरण की जिस शिकायत को गंभीर मानते हुए पुलिस ने जांच शुरू की थी वह मामला फर्जी निकला और अब पुलिस झूठी शिकायत करने की जांच में जुटी है।
दरअसल यह पूरा मामला प्रदेश के डीजीपी के संज्ञान लेने के बाद चर्चा में आ गया। गोरखपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक महिला अपनी नाबालिग बेटी के साथ एसपी कार्यालय पहुंची थी। दोनों ने आरोप लगाया था कि विकास केवट और अर्जुन पासी नामक युवक उनकी बड़ी बेटी का अपहरण करके अपने साथ में ले गए हैं। इसके बाद से उनकी नाबालिग बेटी को छेड़छाड़ करते हुए लगातार परेशान कर रहे हैं।
डीजीपी ने जबलपुर एसपी को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए
युवती के अपहरण की कहानी जबलपुर में चर्चा का विषय बन गई, इसे लेकर पुलिस की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए और खबरों के माध्यम से मामला डीजीपी कैलाश मकवाना तक पहुंचा, जिसके बाद उन्होंने जबलपुर एसपी को इसकी तत्काल जांच कर युवती को छुड़ाने और आरोपियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल शुरू हुई जांच
जबलपुर पुलिस ने जब इस घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की तो पूरी कहानी ही बदल गई। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि शिकायत दर्ज कराने से पहले ही महिला की बड़ी बेटी अपनी मर्जी से विकास केवट नाम के युवक के साथ घर छोड़कर जा चुकी थी। दोनों के बीच प्रेम संबंध थे और युवती अपनी इच्छा से उसके साथ रह रही थी।
मां और बहन से नाराज होकर भागी थी युवती
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि बड़ी बेटी के घर से चले जाने से नाराज होकर मां और उसकी नाबालिग बेटी ने एसपी कार्यालय पहुंचकर विकास केवट के साथियों के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराई। यानी जिन लोगों पर धमकाने और परेशान करने के आरोप लगाए गए थे, वे जांच में सही नहीं पाए गए। एसपी कार्यालय की जांच के बाद स्पष्ट हुआ कि शिकायत तथ्यों पर आधारित नहीं थी और पुलिस को गुमराह करने का प्रयास किया गया।
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झूठी शिकायतों के कारण पुलिस का समय और संसाधन होते हैं खराब
अब इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि झूठी शिकायतों के कारण पुलिस का समय और संसाधन व्यर्थ होते हैं, जिसके कारण कई बार वास्तविक पीड़ितों के मामलों की जांच भी प्रभावित होती है। वहीं कई छोटे छोटे मामले जो आपसी तालमेल और सामंजस्य से सुलझ सकते हैं उन्हें भी थानों तक जबरन लाया जाता है।
