MP High Court का सख्त रुख: मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र पर 60 दिन में फैसला जरूरी
MP High Court का सख्त रुख: मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र पर 60 दिन में फैसला जरूरी, 30 जून तक की दी डेडलाइन, जांच रिपोर्ट के बाद छोड़ना पड़ सकता है मंत्री पद
- Reported By: सुधीर दंडोतिया
MINISTER PRATIMA BAGRI CASE STATUS IN HIGH COURT
BHOPAL NEWS: मध्य प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चल रहे जाति प्रमाण-पत्र विवाद पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जबलपुर पीठ ने राज्य सरकार की उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति को निर्देश दिया है कि वह राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता पर 60 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय ले।
कोर्ट की सख्ती: देरी पर फटकार
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने मामले को लंबे समय तक लंबित रखने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने पूछा कि पिछले एक साल से जांच को रोके रखने का कारण क्या है और इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना।
30 जून तक डेडलाइन
कोर्ट ने साफ कहा- छानबीन समिति 30 जून 2026 तक फैसला दे। मंत्री प्रतिमा बागरी को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाए, समयसीमा में फैसला न होने पर याचिकाकर्ता नई याचिका दायर कर सकेगा। मामले में याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार का दावा है कि- ‘बागरी’ जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग श्रेणी में आती है। बुंदेलखंड, बघेलखंड और महाकौशल में यह राजपूत वर्ग से जुड़ी मानी जाती है। जबकि मालवा-निमाड़ में इसे अनुसूचित जाति (SC) में शामिल किया गया है। याचिका में आरोप है कि राजनीतिक प्रभाव के जरिए अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र बनवाया गया, जिससे वास्तविक पात्रों के अधिकार प्रभावित हुए।
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कांग्रेस का दावा
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद मंत्री को पद छोड़ना पड़ सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह छानबीन समिति के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा। अब सबकी नजर राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति की जांच पर है। यह फैसला न केवल मंत्री प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि जाति प्रमाण-पत्र से जुड़े मामलों में एक अहम मिसाल भी बन सकता है। हाई कोर्ट के इस आदेश ने लंबे समय से लंबित इस विवाद को निर्णायक मोड़ पर ला दिया है, जहां अब तय समयसीमा में स्पष्ट फैसला आना जरूरी हो गया है।
