संन्यास विवाद में हर्षा का पलटवार, राम ने लिखा है मेरा मार्ग, मीरा-बुद्ध का उदाहरण देकर साधा निशाना
संन्यास विवाद में हर्षा का पलटवार: “राम ने लिखा है मेरा मार्ग”, मीरा-बुद्ध का उदाहरण देकर साधा निशाना, आरोपों पर बोलीं- डेढ़ साल से सह रही अपमान, अब मजबूत हूं
- Written By: सुधीर दंडोतिया
HARSHA RICHHARIYA CONTROVERSY IN UJJAIN, BHOPAL
HARSHA RICHHARIYA CONTROVERSY BHOPAL NEWS: उज्जैन में संन्यास को लेकर जारी विवाद के बीच स्वामी हर्षानंद गिरि (पूर्व में हर्षा रिछारिया) ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर संत समाज के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने अपने संन्यास को आस्था और ईश्वर की इच्छा बताते हुए कहा- “अगर राम ने मेरी किस्मत में संन्यास लिखा है, तो उसे कोई नहीं रोक सकता।”
“हर युग में सत्य के मार्ग पर विरोध हुआ”
अपने वीडियो में हर्षा ने कहा कि इतिहास गवाह है- जो भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चला, उसे विरोध और अपमान सहना पड़ा। उन्होंने मीरा बाई, गौतम बुद्ध, जीजस, भगवान राम और सीता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में परीक्षा हुई है, खासकर महिलाओं को अधिक अपमान झेलना पड़ा।
डेढ़ साल से दे रही हूं अग्नि परीक्षा
हर्षा ने कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से लगातार आलोचना और अपमान सह रही हैं। कहा- “मैंने यह सब सहा है और अब मानसिक रूप से मजबूत हो चुकी हूं। यह मेरी आस्था का मार्ग है।”
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Harsha Richhariya Controversy: हर्षा रिछारिया के संन्यास पर विवाद, संत समिति अध्यक्ष ने उठाए सवाल
मुझे जानबूझकर निशाना बनाया गया
हर्षा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ प्रचार और वायरल होने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने संतों की भाषा पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि एक महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल संतों की मर्यादा के खिलाफ है।
अनिलानंद महाराज ने घटनाक्रम को बताया सनातन की मर्यादा के खिलाफ
वहीं, महाराज अनिलानंद ने इस पूरे घटनाक्रम को सनातन धर्म की मर्यादा के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि हर्षा का संन्यास स्वीकार्य नहीं है और उन्हें दीक्षा देने वाले संत की भी जांच होनी चाहिए। उज्जैन का यह संन्यास विवाद अब आस्था बनाम परंपरा की बहस में बदलता नजर आ रहा है, जहां एक ओर हर्षा इसे व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा बता रही हैं, वहीं संत समाज का एक वर्ग इसे परंपराओं के खिलाफ मान रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
