MP ATS की बड़ी कार्रवाई: 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार 3 आरोपी
Bhopal ATS Case : ATS द्वारा गिरफ्तार 3 संदिग्धों को अदालत ने 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एक आरोपी के कथित तौर पर PAK हैंडलर से संपर्क और टारगेट किलिंग की साजिश की जांच जारी है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
कॉन्सेप्ट इमेज (फोटो सोर्स- AI)
MP ATS Terror Suspects : मध्य प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) द्वारा आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीन संदिग्धों को अदालत ने 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। एटीएस ने तीनों आरोपियों को विशेष न्यायाधीश डॉ. मुकेश मलिक की अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए गए।
सुनवाई के दौरान एटीएस ने आरोपियों की आगे की पुलिस रिमांड की मांग नहीं की। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच जारी है।
डिजिटल सबूतों की जांच जारी
एमपी एटीएस का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसी ने आशंका जताई कि यदि आरोपियों को रिहा किया गया तो वे जांच को प्रभावित कर सकते हैं या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए तीनों आरोपियों को 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एटीएस ने इस मामले में तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इनमें भोपाल निवासी फराज, उत्तर प्रदेश के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला और बिहार निवासी इजहारुल हक शामिल हैं।
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पाकिस्तानी हैंडलर से संपर्क की जांच
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी इजहारुल हक सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे एक कथित हैंडलर के संपर्क में था। जांच एजेंसियों के अनुसार, संदिग्धों को भारत में “टारगेट किलिंग” जैसी वारदातों को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर निर्देश दिए जा रहे थे। हालांकि, जांच अभी जारी है और इन आरोपों की पुष्टि आगे की जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण के आधार पर की जाएगी। एटीएस जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डेटा की जांच कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क, संपर्कों और संभावित साजिश की कड़ियों का पता लगाया जा सके।
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डिजिटल साक्ष्यों पर टिकी जांच
फिलहाल जांच एजेंसी का फोकस इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से मिले डिजिटल साक्ष्यों पर है। इन्हीं के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि संदिग्धों की गतिविधियां किस स्तर तक पहुंची थीं और कथित साजिश में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।
