भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट विवाद: कब्रिस्तान और वक्फ जमीन पर निर्माण को लेकर आज सुनवाई, रोक लगाने की है मांग
Bhopal Metro Project Controversy: भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर और वक्फ जमीन पर निर्माण के मामले पर आज सुनवाई होगी। वक्फ बोर्ड में इन निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
- Written By: प्रीतेश जैन
भोपाल मेट्रो (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Bhopal Metro News: भोपाल में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर वक्फ संपत्तियों पर विवाद अब कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है। भोपाल टॉकीज स्थित प्राचीन कब्रिस्तान के नीचे से प्रस्तावित अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन और नारियलखेड़ा स्थित वक्फ जमीन पर निर्माण कार्य के खिलाफ गुरुवार को मध्यप्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में अहम सुनवाई होगी। मामले में मेट्रो निर्माण पर रोक लगाने की मांग को लेकर स्टे पर बहस की जाएगी, जिसमें मेट्रो प्रबंधन भी अपना पक्ष रखेगा।
यह विवाद कमेटी इंतेजामियां औकाफ-ए-अम्मा द्वारा दायर दो अलग-अलग प्रकरणों से जुड़ा है। कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंसार उल हक और अधिवक्ता इब्राहिम सरवत शरीफ खान पैरवी कर रहे हैं। अधिवक्ता खान के अनुसार दोनों मामलों में मेट्रो निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। मामले में अब तक दो बार सुनवाई हो चुकी है और आज अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।
कब्रिस्तान के नीचे अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन पर आपत्ति
पहले मामले में हमीदिया रोड स्थित मासूमा तकिया अम्मनशाह, मस्जिद नूरानी, मुल्लाशाह और अन्य पंजीकृत वक्फ कब्रिस्तान क्षेत्रों के नीचे से अंडरग्राउंड मेट्रो लाइन निकालने की योजना को चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि यह कब्रिस्तान ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है तथा शहर के सबसे पुराने और बड़े कब्रिस्तानों में शामिल है, जहां हजारों कब्रें मौजूद हैं।
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कब्रों को हो सकता है खतरा
कमेटी का दावा है कि प्रस्तावित भोपाल मेट्रो लाइन से करीब एक एकड़ क्षेत्र प्रभावित हो सकता है, जिससे कब्रों की संरचना और अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न होगा। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि मेट्रो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों ने अब तक क्षेत्र का विस्तृत नक्शा, तकनीकी रिपोर्ट और सुरक्षा आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। अधिवक्ता खान ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट के फैसलों में कब्रिस्तान की मूल प्रकृति को संरक्षित रखने की बात कही गई है। उनका कहना है कि अंडरग्राउंड निर्माण, खुदाई और सुरंग निर्माण से कब्रों एवं धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंच सकता है।
नारियलखेड़ा की वक्फ जमीन पर भी विवाद
दूसरा मामला नारियलखेड़ा स्थित वक्फ निशात अफजा (वाके बाग) की जमीन से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि खसरा नंबर 88 की लगभग 11.93 हेक्टेयर वक्फ भूमि पर बिना अनुमति मेट्रो निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। कमेटी के मुताबिक करीब 1.40 एकड़ भूमि पर गड्ढे खोदकर पिलर निर्माण का काम किया जा रहा है। कमेटी का आरोप है कि भारी मशीनरी लगाकर निर्माण सामग्री डाली जा रही है, जिससे वक्फ संपत्ति की मूल स्थिति प्रभावित हो रही है।
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निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग
याचिका में यह भी कहा गया है कि मेट्रो कंपनी से कई बार नक्शा, स्वीकृति और अधिग्रहण से जुड़ी जानकारी मांगी गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। दोनों मामलों में वक्फ अधिकरण से मांग की गई है कि विवादित स्थलों पर मेट्रो निर्माण कार्य तत्काल रोका जाए, अवैध निर्माण हटाया जाए और वक्फ संपत्तियों की यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश जारी किए जाएं।
