कब्रिस्तान विवाद से भोपाल मेट्रो परियोजना में हो सकती है देरी, 2028 तक पूरा होना मुश्किल

Metro Underground Corridor Dispute: भोपाल मेट्रो के अंडरग्राउंड कॉरिडोर को लेकर उपजे विवाद के कारण परियोजना का समय पर पूरा होना मुश्किल है। मुस्लिम पक्ष ने कब्रिस्तान को लेकर आपत्ति जताई है।
Bhopal Metro Project
भोपाल मेट्रो (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bhopal Metro Project: भोपाल मेट्रो प्रोजेक्ट का अंडरग्राउंड कॉरिडोर अब नए विवाद में घिरता नजर आ रहा है। बड़ा बाग कब्रिस्तान क्षेत्र में प्रस्तावित मेट्रो एग्जिट पॉइंट को लेकर विरोध तेज हो गया है। इस विवाद के कारण मेट्रो परियोजना के तय समय 2028 तक पूरा होने पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, जुलाई से टनल बोरिंग मशीन भोपाल रेलवे स्टेशन इलाके से नादरा स्टेशन की ओर खुदाई शुरू करेगी। मेट्रो की डीपीआर के अनुसार नादरा स्टेशन के बाद बड़ा बाग क्षेत्र के पास ट्रेन को भूमिगत ट्रैक से ऊपर लाने की योजना है। इसी जगह एग्जिट पॉइंट प्रस्तावित किया गया है, लेकिन संबंधित जमीन अब तक मेट्रो परियोजना को हस्तांतरित नहीं हो सकी है।

कराया जा रहा जियोलॉजिकल सर्वे

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस स्थान को शाही कब्रिस्तान बताते हुए खुदाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि 24 से 30 मीटर गहराई तक होने वाली खुदाई से पुरानी कब्रों को नुकसान पहुंच सकता है। मामले के तूल पकड़ने के बाद प्रशासन ने इलाके का जियोलॉजिकल सर्वे शुरू करा दिया है, ताकि जमीन के नीचे कब्रों की स्थिति स्पष्ट हो सके।

लागत और समय दोनों बढ़ सकता है

यदि भोपाल मेट्रो का मौजूदा अलाइनमेंट बदला जाता है तो परियोजना की लागत और समय दोनों बढ़ सकते हैं। मेट्रो की अंडरग्राउंड डीपीआर वर्ष 2018 में तैयार हुई थी। ऐसे में किसी भी बदलाव के लिए केंद्र सरकार से नई मंजूरी लेनी होगी, जिससे काम में देरी की संभावना बढ़ जाएगी।

रोजाना खर्च हो रहे 22 लाख रुपए

मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि परियोजना पर रोजाना करीब 22 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। ऐसे में विवाद लंबा खिंचने पर आर्थिक बोझ भी बढ़ेगा। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि बड़ा बाग क्षेत्र में राजस्व विभाग की टीम निरीक्षण कर रही है। जमीन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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