मनुआभान टेकरी कांड: भोपाल कोर्ट ने दो दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा, 7 साल बाद मिला मासूम को न्याय
Rape Murder Case: भोपाल के मनुआभान टेकरी दुष्कर्म और हत्या मामले में अदालत ने दो दोषियों आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला 2019 का है। 7 साल बाद पीड़ित परिजनों को न्याय मिला है।
- Written By: प्रीतेश जैन
कॉन्सेप्ट इमेज (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Bhopal Manuabhan Tekri Case Verdict: राजधानी भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या मामले में विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी करार देते हुए शेष जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा और 8-8 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह जघन्य वारदात साल 2019 में हुई थी, जिसने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर दिया था। 30 अप्रैल 2019 को आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली नाबालिग बालिका अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। इसी दौरान आरोपियों ने सुनसान स्थान पर बालिका के साथ दुष्कर्म किया और बाद में पत्थर से सिर कुचलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को करीब 100 फीट गहरी खाई में स्थित गुफा में छिपा दिया गया था।
पुलिस पूछताछ में टूटा आरोपी
घटना के बाद दोनों आरोपी बालिका को खोजने का नाटक करते रहे ताकि किसी को उन पर शक न हो। बालिका के लापता होने की सूचना पर कोहेफिजा थाना पुलिस ने तत्काल सर्चिंग अभियान शुरू किया। रातभर तलाशी के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला। लेकिन पूछताछ के दौरान अविनाश साहू के बयान बदलने पर पुलिस को संदेह हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर उसने पूरी वारदात कबूल कर ली। इसके बाद पुलिस ने खाई से बालिका का खून से लथपथ शव बरामद किया।
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CBI ने दाखिल कर दी थी क्लोजर रिपोर्ट
मामले में पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, हत्या सहित कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल साक्ष्य और गवाहों के आधार पर विस्तृत चालान अदालत में पेश किया। बाद में इस केस में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। हालांकि सीबीआई ने पुलिस की डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी थी।
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7 साल बाद मिला न्याय
अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार करते हुए उससे स्पष्टीकरण भी मांगा था। लंबे ट्रायल के बाद भोपाल कोर्ट ने सभी साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें शेष जीवन तक जेल में रहने की सजा सुनाई।
