कौन हैं ASP लोकेश कुमार सिन्हा? जिनके नाम से कांपते हैं अपराधी, अब मिलेगा देश का प्रतिष्ठित रुस्तमजी अवार्ड
MP Police Brave Officer: सागर के एएसपी लोकेश कुमार सिन्हा को मिलेगा देश का प्रतिष्ठित रुस्तमजी पुरस्कार, 35 लाख के इनामी नक्सली को पकड़ने और दंगे शांत कराने पर गृह मंत्रालय का बड़ा सम्मान।
- Written By: सजल रघुवंशी
एएसपी लोकेश कुमार सिन्हा (सोर्स- एआई जनरेटेड इमेज)
ASP Lokesh Kumar Sinha For Rustamji Award MP Police: एक ऐसा पुलिस अधिकारी… जिसके नाम से अपराधी कांपते हैं। जिसने खूंखार नक्सली को जिंदा पकड़ा, सांप्रदायिक दंगों को शांत कराया और कई चर्चित मामलों का खुलासा कर कानून का राज कायम किया। अब उसी अधिकारी को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए देश के प्रतिष्ठित रुस्तमजी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। मध्य प्रदेश के सागर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लोकेश कुमार सिन्हा की, जिनकी कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
आज जिस अधिकारी की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल दी जाती है, कभी वही युवक स्कूल-कॉलेज के मंचों पर पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया करता था लेकिन किस्मत ने ऐसा मोड़ लिया कि मंच का अभिनय असल जिंदगी की हकीकत बन गया। लोकेश कुमार सिन्हा ने अपने समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता से पुलिस सेवा में अलग पहचान बनाई है।
इंदौर के रहने वाले हैं लोकेश सिन्हा
मूल रूप से इंदौर के रहने वाले लोकेश सिन्हा ने होलकर साइंस कॉलेज से बीएससी मैथेमेटिक्स की पढ़ाई की। शुरुआत में उन्होंने सब इंस्पेक्टर भर्ती की तैयारी की लेकिन दो बार असफल रहे। हार मानने के बजाय उन्होंने बड़ा लक्ष्य तय किया और मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी पीएससी की तैयारी शुरू कर दी। मेहनत रंग लाई और पहले ही प्रयास में डीएसपी पद के लिए चयनित हो गए। वर्ष 2011 में चयन के बाद उनकी ट्रेनिंग सागर स्थित जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी में हुई।
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भिंड, बालाघाट और भोपाल में भी दे चुके हैं सेवाएं
भिंड, बालाघाट, भोपाल, जबलपुर और अब सागर में अपनी सेवाएं दे चुके लोकेश सिन्हा का पुलिस करियर कई बड़ी उपलब्धियों से भरा हुआ है। बालाघाट में एसडीओपी रहते हुए उन्होंने 35 लाख रुपए के इनामी खूंखार नक्सली दिलीप गुहा को अपनी टीम के साथ जिंदा गिरफ्तार किया था। यह नक्सली 159 से अधिक अपराधों में शामिल था और तीन राज्यों की पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था।
2018 में भोपाल में सांप्रदायिक तनाव के दौरान संभाला था मोर्च
राजधानी भोपाल में पदस्थापना के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील मामलों को सफलतापूर्वक संभाला। वर्ष 2018 में भोपाल के कर्फ्यू वाली माता क्षेत्र में हुए सांप्रदायिक तनाव के दौरान उन्होंने मोर्चा संभालकर हालात को नियंत्रण में रखा। वहीं एक नाबालिग की हत्या के चर्चित मामले में उत्कृष्ट विवेचना कर आरोपी को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। इस उपलब्धि के लिए उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन अवार्ड भी मिल चुका है।
सागर में शांती बनाए रखने में है अहम योगदान
सागर में भी उनकी कार्यशैली लगातार चर्चा में रही है। वर्ष 2024 में रंगपंचमी के दौरान कैंट क्षेत्र में हुए सांप्रदायिक विवाद में उन्होंने खुद मैदान में उतरकर हालात को संभाला। रातभर कार्रवाई करते हुए उपद्रवियों को गिरफ्तार किया और संभावित बड़ी घटना को टाल दिया। इसी उल्लेखनीय कार्य के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें रुस्तमजी पुरस्कार देने की घोषणा की है। इस सम्मान के तहत उन्हें 50 हजार रुपए की नगद राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा।
लोकेश सिन्हा के लिए पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी
लोकेश सिन्हा का मानना है कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है। वह कहते हैं कि पुलिस और परिवार के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण जरूर है लेकिन समय के साथ इसे बेहतर तरीके से निभाया जा सकता है। यही सोच उन्हें एक बेहतर अधिकारी और बेहतर इंसान बनाती है।
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संघर्ष, साहस, कर्तव्य और ईमानदारी… इन चार शब्दों में अगर किसी पुलिस अधिकारी की पहचान समेटी जाए, तो वह नाम है लोकेश कुमार सिन्हा। उनका सम्मान सिर्फ एक अधिकारी का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे सागर पुलिस परिवार और मध्य प्रदेश पुलिस के लिए गौरव का क्षण है।
