किसी के ख्यालों में खोया व्यक्ति या रिश्ते को लेकर कंफ्यूज कपल (सौ. एआई)
Relationship Psychology: आधुनिक डेटिंग की दुनिया में अक्सर हम किसी के प्रति इतने आकर्षित हो जाते हैं कि हमारा दिन-रात बस उसी के ख्यालों में बीतने लगता है। कई बार हमें लगता है कि यही सच्चा प्यार है लेकिन मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति प्यार नहीं बल्कि लिमेरेंस हो सकती है। यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जहां आप किसी व्यक्ति के साथ वास्तविक संबंध बनाने के बजाय अपने दिमाग में उसके इर्द-गिर्द बुनी गई एक काल्पनिक कहानी में जीने लगते हैं।
जानकारी के अनुसार लिमेरेंस किसी व्यक्ति के प्रति एक तीव्र भावनात्मक जुनून है जहां आपका मन बार-बार उसी की ओर खिंचा चला जाता है। यह किसी इंसान को जानने से ज्यादा उस अहसास के बारे में है जो वह व्यक्ति आपके भीतर पैदा करता है। आसान शब्दों में कहें तो लिमेरेंस कोई रिश्ता नहीं है बल्कि एक ऐसी कहानी है जो आप खुद को सुना रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लिमेरेंस अचानक नहीं आता बल्कि यह चार चरणों में विकसित होता है।
आकर्षण: एक तीव्र और तत्काल चिंगारी या जुड़ाव महसूस होना।
दखल देने वाली सोच: जब आप उस व्यक्ति के बारे में सोचना बंद नहीं कर पाते।
भावनात्मक निर्भरता: जब आपका मूड पूरी तरह से उस व्यक्ति की प्रतिक्रिया या मैसेज पर निर्भर करने लगता है।
पतन या धुंधला होना: यह तब होता है जब वास्तविकता आपकी कल्पना से मेल नहीं खाती और भ्रम टूटने लगता है।
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
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इन दोनों के बीच का अंतर बहुत बारीक लेकिन महत्वपूर्ण है। जहां प्यार स्थिर जमीन से जुड़ा और आपसी समझ पर आधारित होता है वहीं लिमेरेंस आपको पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लेता है और आप सामने वाले व्यक्ति को हकीकत से दूर एक ऊंचे पायदान पर बिठा देते हैं। प्यार आपकी दुनिया का विस्तार करता है जबकि लिमेरेंस उसे सिर्फ एक व्यक्ति तक समेट देता है।
लिमेरेंस अक्सर एक नशे की तरह काम करता है जो अकेलेपन को दूर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जब आपकी खुशी किसी के टेक्स्ट बैक करने या आपको नोटिस करने पर टिकी होती है तो यह चिंता और भावनात्मक उतार-चढ़ाव का एक चक्र बना देता है। यह स्थिति अक्सर पुराने भावनात्मक जख्मों या अनमेट नीड्स से जुड़ी होती है जहां आप सुरक्षा की तलाश में किसी अजनबी पर अपनी उम्मीदें थोप देते हैं।
लिमेरेंस को रातों-रात खत्म नहीं किया जा सकता लेकिन इसे समझा और प्रबंधित किया जा सकता है। पहला कदम इस पैटर्न को पहचानना है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अपनी दिनचर्या और अन्य रिश्तों से दोबारा जुड़ें और अपनी कल्पनाओं पर सवाल उठाएं। चूंकि यह अक्सर पुराने सदमों का संकेत होता है इसलिए पेशेवर मदद या थेरेपी लेना सबसे प्रभावी तरीका साबित हो सकता है।