Endangered Species Day: हर साल धरती से विलुप्त हो रही हजारों प्रजातियां, काले मुंहे वाले बंदर बचे हैं सबसे कम
Endangered Species Day 2026: पृथ्वी पर 16 हजार से भी अधिक प्रजाति के जानवर, पौधे, शैवाल व कवक पाए जाते हैं। इन सबका हमारे इको सिस्टम में अहम भूमिका है। लुप्तप्राय प्रजाति दिवस प्रत्येक वर्ष मई माह के तीसरे शुक्रवार को मनाया जाता है।
- Written By: रीता राय सागर
लाल पांडा बड़े विशाल पांडा से अलग होते हैं। भारत में इन छोटे और प्यारे स्तनधारी की संख्या महज 5000 बची है। IUCN ने इन्हें भी रेड लिस्ट में शामिल किया है।
यह ओल्ड वर्ल्ड मंकी दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट पर पाए जाते हैं। इनकी विशेषता है इनका काला चेहरा। इस लुप्तप्राय प्रजाति को बचाने के लिए भारत के वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची 1 में ऐसे कानून शामिल हैं, जो इन बंदरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं।
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2012 की स्टडी के अनुसार, यह संकटग्रस्ट प्रजाति लगभग 30 हजार बची हुई है। इनके संरक्षण के लिए इनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण जरूरी है। लोगों में इस बारे में जागरूकता भी बहुत ज़रूरी है, ताकि वे अपने निजी इस्तेमाल के लिए इनको परेशान न करें।
भारतीय उप महाद्वीप में पाया जाने वाला ग्रेट इंडियन बस्टर्ड उड़ने वाले पक्षियों में सबसे भारी पक्षियों में से एक है। यह प्रजाति अब 300 से भी कम बची हुई है। यह मध्यप्रदेश, गुजरात,राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश में देखे जा सकते है।
जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश भारत के वे राज्य हैं, जहां इन खूबसूरत जानवरों को देखा जा सकता है। हिमालय की बर्फीली पहाड़ियाँ इन हिम तेंदुओं का घर हैं।
खाल और पंजों के लिए बंगाल टाइगर का शिकार किया जाता है। बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा भी इनके विलुप्त होने का एक कारण है। साथ ही शहरीकरण से इनके जंगल नष्ट होते जा रहे हैं।
