प्यार या दिमागी खेल? जानें क्या है नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप, जो अंदर ही अंदर आपको कर रहा है खोखला
Narcissistic Relationship: कई बार रिश्ता बाहर से परफेक्ट दिखता है लेकिन अंदर ही अंदर मानसिक थकान, आत्मविश्वास की कमी और खालीपन पैदा करने लगता है। ऐसे रिश्तों को नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप कहा जाता है।
- Written By: प्रीति शर्मा
रिश्ते में उलझी और परेशान महिला (सौ. एआई)
Narcissistic Relationship Signs: अक्सर कहा जाता है कि इंसान का प्यार खुद नहीं मरता बल्कि उसे पार्टनर की लगातार अनदेखी और आत्ममुग्धता (Narcissism) मार देती है। आज के दौर में जहां सोशल मीडिया और सेल्फ-ब्रांडिंग का चलन बढ़ा है वहां रिश्तों में नार्सिसिज्म एक कड़वी हकीकत बनकर उभरा है। साइकोलॉजिस्ट के अनुसार नार्सिसिस्टिक व्यक्तित्व वाला व्यक्ति खुद को ब्रह्मांड का केंद्र मानता है। उसे हर पल तारीफ और अटेंशन चाहिए होता है और ऐसा न होने पर वह रिश्ते में दूरियां और कड़वाहट पैदा करने लगता है।
क्या होता है नार्सिसिज्म?
मेडिकल रिपोर्ट्स की मानें तो नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी डिसऑर्डर केवल रोमांस तक सीमित नहीं है। यह व्यक्ति के काम, पैसे और सामाजिक व्यवहार को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोग अंदरूनी रूप से असुरक्षित होते हैं और अक्सर अपनी तुलना दूसरों से करते हैं। एक संतुलित रिश्ते में दोनों की भावनाओं की कद्र होती है लेकिन नार्सिसिस्ट व्यक्ति केवल अपनी जरूरतों और इच्छाओं को प्राथमिकता देता है जिससे सामने वाले को अपनी अहमियत शून्य लगने लगती है।
पहचानें ये रेड फ्लैग्स
एक्सपर्ट्स के मुताबिक हर छोटी बहस नार्सिसिज्म नहीं है लेकिन यदि आपका पार्टनर नीचे दिए गए व्यवहार लगातार कर रहा है तो सावधान हो जाएं।
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गैसलाइटिंग (Gaslighting): आपको अपनी ही सच्चाई और याददाश्त पर शक करने के लिए मजबूर करना।
लगातार वैलिडेशन की मांग: हर वक्त अपनी तारीफ सुनने की चाहत रखना।
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सहानुभूति की कमी: आपकी तकलीफ या नजरिए को पूरी तरह नजरअंदाज करना।
नियंत्रण की चाहत: रिश्ते का मूड और दिशा हमेशा अपनी मर्जी से तय करना।
बाउंड्री का सम्मान न करना: आपकी प्राइवेसी या व्यक्तिगत सीमाओं को बार-बार लांघना।
लेबल लगाने से पहले बरतें सावधानी
आजकल नार्सिसिस्ट शब्द एक ट्रेंड बन गया है। साइकोलॉजिस्ट चेतावनी देते हैं कि हर स्वार्थी व्यवहार या तकरार को नार्सिसिज्म कहना गलत है। जल्दबाजी में पार्टनर पर ऐसा लेबल लगाना रिश्ते को सुधारने के बजाय और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। जागरूकता और समझदारी के बीच एक महीन रेखा है जिसे पहचानना जरूरी है।
स्वस्थ रिश्ते सहानुभूति, जिम्मेदारी और भावनात्मक सुरक्षा पर टिकते हैं। यदि आपको लगता है कि आपका रिश्ता मानसिक रूप से थका देने वाला हो गया है तो आत्ममंथन करें और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल काउंसलर की मदद लेने में न हिचकिचाएं। दूसरों में कमियां ढूंढने से पहले खुद की भावनाओं की सुरक्षा करना भी आपकी जिम्मेदारी है।
