Ramadan Fasting Rules: भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना टूट सकता है आपका रोजा!
Ramadan Roza Rules: रमजान का महीना इबादत और संयम का खास समय होता है। रोजा रखते समय कुछ छोटी-छोटी गलतियां अनजाने में हो सकती हैं जिससे आपका रोजा टूट सकता है।
- Written By: प्रीति शर्मा
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. सोशल मीडिया)
Ramadan Rules 2026: रमजान इस्लाम का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। यह सब्र, इबादत और दान का महीना है। इस बार रमजान की शुरुआत चांद के दिखाई देने पर 17 या 18 को हो सकती है। यह अलग-अलग देशों और मुस्लिम समुदायों में चांद देखने के तरीके और इस्लामिक अथॉरिटी की घोषणा के अनुसार होता है।
रमजान का महीना केवल खान-पान के परहेज का नाम नहीं है बल्कि यह रूह (आत्मा) की पाकीजगी का समय है। इसी महीने में पवित्र कुरान का अवतरण हुआ था इसलिए इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यदि आप भी इस वर्ष रोजा रख रहे हैं तो इन नियमों का पालन करें ताकि आपकी इबादत कुबूल हो सके।
रमजान में क्या करें
- रोजा रखने का मकसद केवल भूख-प्यास सहना नहीं बल्कि बुरे विचारों और कार्यों से तौबा करना है।
- पांच वक्त की नमाज के साथ-साथ रात की विशेष नमाज तरावीह का पाबंदी से पालन करें।
- इस पाक महीने में कुरान पढ़ने और उसके अर्थ को समझने का सवाब कई गुना ज्यादा मिलता है।
- रमजान दान-पुण्य का महीना है। अपनी कमाई का एक हिस्सा (जकात) गरीबों और जरूरतमंदों में बांटना हर सक्षम मुसलमान का फर्ज है।
- सहरी कभी न छोड़ें क्योंकि यह सुन्नत है। वहीं इफ्तार के समय खजूर और पानी का इस्तेमाल कर सादगी से रोजा खोलें।
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प्रतीकात्मतक तस्वीर (सौ. एआई)
रमजान में क्या न करें
- झूठ बोलना, चुगली करना (गीबत), गाली-गलौज या किसी की बुराई करने से रोजा मकरूह (अशुद्ध) हो सकता है।
- रमजान सब्र का इम्तिहान है। किसी भी तरह के झगड़े या गुस्से वाली स्थिति से खुद को दूर रखें।
- धूम्रपान, नशा या किसी भी अनैतिक कार्य से पूरी तरह दूर रहें। साथ ही, इफ्तार पार्टियों में भोजन की बर्बादी और दिखावे वाली फिजूलखर्ची से बचें।
- रोजा रखने के नाम पर खुद को बीमार न करें। सहरी और इफ्तार में संतुलित आहार लें और शरीर को हाइड्रेटेड रखें।
- रमजान की आखिरी 10 रातों में शब-ए-कद्र (Lailat-ul-Qadr) को तलाशें जो हजार महीनों की इबादत से बेहतर मानी गई है। अपनी गलतियों के लिए माफी मांगें और नेक राह पर चलने का संकल्प लें।
रमजान खत्म होने पर ईद उल फितर मनाई जाती है। यह त्योहारा रोजों के पूरा होने, आपसी भाईचारे और आत्मिक सफर के खत्म होने का जश्न है। इस दिन लोग एक दूसरे से लगे मिलकर मुबारकबाद देते हैं और खास पकवान बनाते हैं।
