निपाह वायरस (सौ.सोशल मीडिया)
Nipah Virus cases in West Bengal: निपाह वायरस ने एक बार फिर दस्तक दी है जिससे देशभर में चिंता का माहौल बन गया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य में निपाह वायरस के 5 मामलों की पुष्टि हुई है। वायरस के संपर्क में आए करीब 100 लोगों को एहतियातन क्वारंटाइन में रखा गया है। इनमें कुछ स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं, जिन्हें अस्पताल में निगरानी में रखा गया है ताकि संक्रमण आगे न फैले। 11 जनवरी 2026 को सामने आए दो संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य एजेंसियों की सतर्कता और बढ़ा दी है।
निपाह वायरस कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसकी गंभीरता इसे बेहद खतरनाक बनाती है। यह एक ज़ूनोटिक वायरस है, यानी जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। इसकी पहचान पहली बार 1999 में मलेशिया में हुई थी। भारत में इससे पहले केरल जैसे राज्यों में भी इसके मामले सामने आ चुके हैं। यह वायरस मुख्य रूप से दिमाग (एन्सेफलाइटिस) और सांस से जुड़ी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है, जिससे मरीज की हालत तेजी से बिगड़ सकती है।
निपाह वायरस के फैलने के प्रमुख कारणों में फल खाने वाले चमगादड़ सबसे अहम हैं, जो इसके प्राकृतिक वाहक माने जाते हैं। चमगादड़ों की लार या मल से दूषित फल खाने से संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा खुले में रखा खजूर का रस (ताड़ी), संक्रमित व्यक्ति के बहुत नजदीकी संपर्क में आने से या बिना सुरक्षा के इलाज के दौरान भी यह वायरस फैल सकता है। कुछ मामलों में सूअर जैसे जानवरों के जरिए संक्रमण की आशंका भी सामने आई है।
शुरुआत में इसके लक्षण आम बुखार जैसे लग सकते हैं, जैसे तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, गले में दर्द और थकान। लेकिन बाद में सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना, भ्रम, बेहोशी या दौरे पड़ने जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
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खुले में रखे फल या कच्चा खजूर का रस खाने से बचें
फलों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं
बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें और मास्क का उपयोग करें
अस्पतालों में इलाज के दौरान संक्रमण नियंत्रण नियमों का पालन करें
लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
सतर्कता, सही जानकारी और समय पर इलाज ही निपाह वायरस से बचाव का सबसे मजबूत तरीका है।