

Mental Health Tips: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम समस्या बन गई है। काम का दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, भविष्य की चिंता या लगातार स्क्रीन पर बिताया जाने वाला समय मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। जीवन में थोड़ी बहुत चिंता सामान्य बात है, लेकिन अगर हर समय बेचैनी बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कुछ आसान आदतों को अपनाकर आप कुछ ही मिनटों में अपने मन और शरीर को शांत महसूस कराया जा सकता है। यहां जानिए ऐसे 5 सरल तरीके, जो तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
जब हम तनाव में होते हैं, तो हमारी सांसें तेज और उथली हो जाती हैं। ऐसे समय में कुछ मिनट तक गहरी और धीमी सांस लेने से शरीर का नर्वस सिस्टम शांत होने लगता है। नाक से धीरे-धीरे सांस लें, कुछ सेकंड रोकें और फिर मुंह से आराम से बाहर छोड़ें। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और मन स्थिर होता है।
अगर मन बार-बार नकारात्मक विचारों में उलझ रहा है, तो खुद को वर्तमान समय पर फोकस करने की कोशिश करें। इसके लिए आप अपने आसपास की पांच चीजें देखें, चार चीजों को छुएं, तीन आवाजें सुनें, दो खुशबुओं को महसूस करें और एक स्वाद पर ध्यान दें। इससे माइंड डायवर्ट होगा और फोकस वर्तमान समय पर होगा।
तनाव महसूस होने पर लंबे समय तक एक जगह बैठे रहने की बजाय कुछ देर टहलें, स्ट्रेचिंग करें या हल्का-फुल्का व्यायाम करें। शारीरिक गतिविधि से एंडोर्फिन हार्मोन निकलता है, जिसे 'फील गुड हार्मोन' भी कहा जाता है। इससे मूड बेहतर हो सकता है और तनाव कम महसूस होता है।
चिंता के समय अक्सर दिमाग में नकारात्मक विचार आने लगते हैं। ऐसे में खुद को याद दिलाएं कि यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी और आप इससे बाहर निकल सकते हैं। खुद से सकारात्मक बातें करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और मानसिक दबाव कम होने लगता है।
मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया पर लगातार समय बिताने से मानसिक थकान और तनाव बढ़ सकता है। अगर आप बेचैनी महसूस कर रहे हैं, तो कुछ देर के लिए स्क्रीन बंद करें, खुली हवा में जाएं, पानी पिएं या अपनी पसंद का संगीत सुनें। इससे दिमाग को आराम मिलता है और मन हल्का महसूस हो सकता है।
अगर चिंता कई सप्ताह तक लगातार बनी रहे, रोजमर्रा के काम में परेशानी होने लगे, नींद प्रभावित हो या पैनिक अटैक आने लगें, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना जरूरी है। समय पर उपचार और सही मार्गदर्शन से स्थिति में सुधार हो सकता है।