लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है मीडिया, जानिए कब से हुई राष्ट्रीय प्रेस दिवस की शुरुआत
History of National Press Day: मीडिया के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देने के लिए हमारे समाज में स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस की जरूरी भूमिका का सम्मान देने के लिए हर साल प्रेस दिवस मनाते है।
- Written By: दीपिका पाल
राष्ट्रीय प्रेस दिवस (सौ. सोशल मीडिया)
National Press Day 2025: आज देशभर में राष्ट्रीय प्रेस दिवस यानि नेशनल प्रेस डे मनाया जा रहा है। यह दिन लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया के महत्व को बताता है। मीडिया का कार्य जनता के बीच एक मीडियम बनकर उभरना है। यह जनता की राय को आकार देने, विकास को गति देने और सत्ता को जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई सालों से लाखों लोगों के बीच मीडिया हिताों की रक्षा करने और पारदर्शिता को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।
मीडिया के महत्वपूर्ण योगदान को मान्यता देने के लिए हमारे समाज में स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस की जरूरी भूमिका का सम्मान करते हुए हर साल 16 नवंबर को ‘राष्ट्रीय प्रेस दिवस’ मनाया जाता है।
जानिए कब से हुई शुरुआत
राष्ट्रीय प्रेस दिवस का इतिहास काफी पुराना माना जाता है। जब 1966 में भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने अपना कामकाज शुरू किया था। यह दिवस न केवल प्रेस की उपलब्धियों को दर्शाता है बल्कि पारदर्शी और शिक्षित समाज के निर्माण में इसके उत्तरदायित्व को भी बढ़ावा देता है। प्रेस के कार्यों को एक जगह पर समायोजित करने के लिए प्रेस के परिषद बनाने की तैयारी की गई। इस परिषद की स्थापना का विचार पहली बार 1956 में प्रथम प्रेस आयोग की ओर से सुझाया गया। इस आयोग ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने और नैतिक रिपोर्टिंग को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर दिया था। प्रथम प्रेस आयोग की सिफारिशों के बाद भारतीय प्रेस परिषद अधिनियम 1965 लाया गया। इसके तहत 1966 में भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) की स्थापना की गई।
सम्बंधित ख़बरें
Digital Safety Tips for Kids: बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए सिखाएं ये जरूरी डिजिटल सुरक्षा के रूल्स
नासिक में डिजिटल माध्यम से घर-घर जनगणना शुरू; नागरिकों से पूछे जाएंगे 34 सवाल, दस्तावेज दिखाना जरूरी नहीं
अब आपकी आवाज भी हो सकती है चोरी, इससे बचने के लिए Taylor Swift ने उठाया बड़ा कदम
नवराष्ट्र डिजिटल इन्फ्लुएंसर समिट: पुणे में सजेगा डिजिटल सितारों का मेला, 25 कैटेगरी में मिलेगा सम्मान
जानिए राष्ट्रीय प्रेस दिवस का उद्देश्य
इस राष्ट्रीय प्रेस दिवस की बात की जाए तो इसके कई उद्देश्य है। इसमें ही प्राथमिक उद्देश्य की बात की जाए तो, भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को संरक्षित करने और पत्रकारिता के उच्च मानकों को बनाए रखना था। अपने गठन के बाद से पीसीआई ने प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1975 में आपातकाल के दौरान परिषद को भंग कर दिया गया था और एक नए अधिनियम प्रेस परिषद अधिनियम, 1978 ने 1979 में पीसीआई को फिर से स्थापित किया और वैधानिक अधिकार के साथ एक अर्ध-न्यायिक निकाय के रूप में इसकी भूमिका की पुष्टि की।
परिषद में कौन-कौन होते है
यहां पर प्रेस परिषद की बात की जाए तो, यहां पर परिषद में एक अध्यक्ष (आमतौर पर सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश) और 28 सदस्य होते हैं। इन सदस्यों में पत्रकार, मीडिया प्रतिष्ठानों के मालिक, सांसद और शिक्षा, कानून व साहित्य जगत के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसे प्रेस की स्वतंत्रता, पत्रकारीय नैतिकता और लोक आंकाक्षाओं से संबंधित मुद्दों पर मध्यस्थता करने और प्रेस को प्रभावित करने वाले कानूनों पर सिफारिशें देने का अधिकार है।
ये भी पढ़ें- फोर्ट वाशिंगटन का पतन: 16 November 1776 जब 2800 अमेरिकी सैनिकों ने किया था आत्मसमर्पण
यह स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई कर सकता है या अनैतिक रिपोर्टिंग या प्रेस की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप से संबंधित शिकायतों की जांच कर सकता है। इसके निर्णय अंतिम होते हैं और इन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती। पिछले कुछ सालों में पीसीआई ने भारतीय पत्रकारिता के नैतिक ढांचे को आकार देने और मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आईएएनएस के अनुसार
