International Tiger Day: भारतीय बाघों के DNA में बदलाव ने बढ़ाई चिंता, इनब्रीडिंग पर वैज्ञानिकों की चेतावनी
International Tiger Day 2026: 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है। इसका मकसद बाघों के संरक्षण, उनके आवास की सुरक्षा, अवैध शिकार और खतरे में पड़े बाघों को बचाने के लिए जागरूकता बढ़ाना है।
- Written By: रीता राय सागर
बाघ (फोटो,सोशल मीडिया)
Indian Tigers DNA Research: भारत में बाघों को लेकर अनेकों रिसर्च हुए हैं, जो उनके अनुवांशिक विविधता, DNA में हो रहे बदलाव और इनब्रीडिंग के प्रभावों के अध्ययन को लेकर किए गए।
दरअसल, विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही वंश या करीबी रिश्ते वाले बाघों के बीच बार-बार प्रजनन होने से उनकी अनुवांशिक विविधता प्रभावित होती है। इसका असर बाघों की शारीरिक क्षमता, वजन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और लंबे समय तक प्रजाति के अस्तित्व पर पड़ने लगता है।
29 जुलाई को मनाए जाने वाले टाइगर्स डे के मौके पर बाघों के संरक्षण से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। भारत में बाघों के DNA और अलग-अलग टाइगर रिजर्व में रहने वाली आबादी के बीच जीन को समझने के लिए भी कई स्तरों पर शोध किया जा रहा है।
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बाघों के DNA पर कैसे हो रहा है अध्ययन?
बाघों के डीएनए के संबंध में पता लगाने के लिए वैज्ञानिक उनके मल, बाल और रक्त के नमूने इकठ्ठा करते हैं और फिर उन्हें एग्जामिन किया जाता है। इन नमूनों से पता चलता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले बाघों के बीच कितना अनुवांशिक संबंध है और इनमें इनब्रीडिंग का खतरा कितना बढ़ रहा है।
इसके अलावा बाघों के व्यवहार, चलने के तरीके, पंजों के निशान और उनका आक्रामक होने के तरीके से संबंधिक डेटा भी एकत्रित किया जा रहा है। इससे बाघों के प्राकृतिक आवास के बारे में भी समझने में आसानी होगी।
बाघ (फोटो,सोशल मीडिया)
क्या है इनब्रीडिंग?
जब एक ही परिवार या करीबी जेनेटिक रिलेशन रखने वाले मेल-फीमेल टाइगर के बीच बार-बार प्रजनन होता है, तो इसे इनब्रीडिंग कहा जाता है। यह स्थिति तब अधिक होती है, जब कोई टाइगर रिजर्व या जंगल दूसरे वन क्षेत्रों से अलग-थलग पड़ जाए और वहां नए बाघों का आना-जाना कम हो जाए। ऐसे में एक ही प्रकार के बाघों के बीच प्रजनन होता है और जीन विविधता पर संकट बढ़ जाता है।
इनब्रीडिंग से होने वाले नुकसान
विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार इनब्रीडिंग होने पर बाघों में अनुवांशिक विविधता घट सकती है। इसके कारण उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने लगती है, जन्मजात समस्याओं का खतरा बढ़ता है और शारीरिक मजबूती भी कम होने लगती है।
बाघ (फोटो,सोशल मीडिया)
सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व में क्यों बढ़ी चिंता?
ओडिशा के सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व में इनब्रीडिंग का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। यहां बाघों की आबादी अपेक्षाकृत छोटी और अलग-थलग रही है। यहां ब्लैक टाइगर को लेकर समस्या बड़ गई है। अनुवांशिक विविधता बढ़ाने के उद्देश्य से हाल के वर्षों में दूसरे टाइगर रिजर्व से बाघों को सिमिलीपाल लाने की पहल की गई।
टाइगर कॉरिडोर क्यों हैं जरूरी?
विशेषज्ञों टाइगर कॉरिडोर की सिफारिश करते हैं, जिससे अलग-अलग जंगलों से टाइगर एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में जा सकते हैं, जिससे अलग-अलग आबादी के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान बना रहेगा।
