Gen Z वर्ल्ड में आखिर कितना बदल गया फ्रेंडशिप डे का खास दिन, जानिए लेख में
International Friendship Day 2025: वक्त अब डिजिटल हो गया है लेकिन दोस्ती जैसा रिश्ता आज भी लोगों के साथ विद्यमान है। Zen Z की दुनिया में फ्रेंडशिप डे कितना बदल गय़ा और क्या अपनापन आज भी है।
- Written By: दीपिका पाल
फ्रेंडशिप डे 2025 (सौ. सोशल मीडिया)
International Friendship Day 2025: आज भारत समेत दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस( International Friendship Day) मनाया जा रहा है। यह दोस्ती जैसे खास रिश्ते के महत्व को बताने के लिए मनाया जाता है। माता-पिता और परिवार के बाद दोस्ती का रिश्ता ही दुनिया में सबसे खास रिश्ते में से एक होता है। इस रिश्ते की कीमत हमें बुरे दौर में ही समझ जाती है। दोस्ती का रिश्ता दो लोगों के बीच आपसी समझ औऱ प्यार का बंधन है। आपका सच्चा दोस्त वहीं होता है, जो आपको करीब से और दिल से जानता है। सच्ची दोस्ती में मैं-तुम जैसा कुछ नहीं होता बस होता है तो बस हम साथ है का प्यारा रिश्ता।
भले ही वक्त अब डिजिटल हो गया है लेकिन दोस्ती जैसा रिश्ता आज भी लोगों के साथ विद्यमान है। पुराने दौर में जहां पर फ्रेंडशिप डे लोगों के बीच त्योहार के रूप में मनाया जाता था वहीं पर अब सोशल मीडिया की स्टोरी बनकर रह गया है। जो एक दिन के लिए खास होता है बाकी दिन अपरिचित सा भाव। Gen Z की दुनिया में फ्रेंडशिप डे कितना बदल गया और क्या अपनापन आज भी दोस्ती में नजर आता है चलिए इसे अच्छी तरह जानते है…
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रील के जमाने में गायब हुआ ग्रीटिंग कार्ड
पहले के दौर में मित्रता दिवस को लेकर दोस्तों में एक अलग ही उत्साह नजर आता था। स्कूलों में फ्रेंडशिप डे के आने से पहले ही फ्रेंडशिप बैंड औऱ ग्रीटिंग कार्ड की बिक्री मार्केट में शुरु हो जाती है। इस खास दिन को मनाने के लिए स्कूल के दोस्तों में फ्रेंडशिप बैंड और ग्रीटिंग कार्ड देने की होड़ सी लग जाती थी। सारे दोस्त एक-दूसरे को दोस्ती दिवस की शुभकामना देते हुए गले मिलते थे और टॉफी आपस में बांटते थे। पहले सोशल मीडिया नहीं था लेकिन दोस्ती दिवस मनाने के कई तरीके थे। अब दौर काफी आगे बढ़ गया है जहां पर सोशल मीडिया पर फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेट किया जाता है। दोस्तों की तस्वीरों, खास लम्हों को सोशल मीडिया इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर स्टोरी के रूप में लगाते है। फ्रेंडशिप के मौके पर पहले जहां पर खास आयोजन दोस्तों के बीच होता था और काफी सारा समय दोस्त आपस में बिताते थे और अपनापन झलकता था। वहीं पर डिजिटल युग में ऐसा अपनापन नजर नहीं आता है।सोशल मीडिया पर पोस्ट, स्टेटस अपडेट और ऑनलाइन गेमिंग जैसे तरीके ही बस नजर आते है।
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कितने है सच्चे दोस्त
सोशल मीडिया अब लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गया है जहां पर ढेरों फ्रेंड्स की लिस्ट प्रोफाइल पर नजर आती है। सोशल मीडिया दोस्तों की लंबी लिस्ट भले हो लेकिन सच्चे दोस्त इसमें कितने मिल जाएंगे इसका पता नहीं होता है। सच्चा दोस्त वहीं होता है जो आपके दु:ख में साथी बनकर आपकी मुसीबतों से लड़ने में साथ दें और हिम्मत बनें। सोशल मीडिया दोस्तों से आप कितना भी सुख-दुख बांट लें लेकिन अपनापन का अहसास एक सच्चे दोस्त से ही होता है। आपके जीवन में एक सच्चा दोस्त होना चाहिए जो सुख में तो साथ ही रहे लेकिन दुख में आपके एक कॉल पर साथ आकर खड़ा हो जाएं। दोस्ती अब लोगों के बीच फॉर्मेलिटी बन गई है जिसे निभाना बस फ्रेंडशिप डे के दिन होता है। जेनरेशन ज़ेड में अब दोस्ती का मतलब बस सोशल मीडिया का स्टेटस हो गया है।
दोस्ती का जो रिश्ता जो पुराने दौर में सर्वोपरि रहता था वहीं पर कहीं खो सा गया है जो आने वाले समय में शायद ही स्थायित्व में ही ना रहें। जहां पहले फ्रेंडशिप बैंड बांधकर लोग जिंदगी भर दोस्ती निभाने का वादा करते थे वहीं पर अब सोशल मीडिया रील और स्टोरी लगाकर फार्मेलिटी निभाते है। अंतत: एक बात हमेशा रह जाएगी दोस्ती के प्यारे से रिश्ते को खोने से बचाने के लिए इसमें अपनापन का भाव हमेशा बनाकर रखिए ताकि बुरे दौर में कुछ अच्छे साथी साथ रहकर परिवार बन जाए।
