World Thrombosis Day 2026: महिलाओं में क्यों बढ़ सकता है ब्लड क्लॉट का खतरा, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

World Thrombosis Day: वर्ल्ड थ्रोम्बोसिस डे के मौके पर जानें महिलाओं के स्वास्थ्य पर कैसे डालता है यह असर, थ्रोम्बोसिस यानी खून का थक्का बनने की वजह, इसके शुरुआती लक्षण और बचाव के जरूरी तरीके।
World thrombosis day blood clot symptoms risk prevention.
थ्रोम्बोसिस डेफोटो.सोशल मीडिया
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Highlights:

  • थ्रोम्बोसिस में खून का थक्का रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है।

  • गर्भावस्था, हार्मोनल दवाएं और लंबे समय तक बैठे रहना जोखिम बढ़ा सकते हैं।

  • पैर में अचानक सूजन या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

Blood Clot Risk In Women: हर साल 13 अक्टूबर को World Thrombosis Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी से जुड़े जोखिम, लक्षणों और बचाव के बारे में जागरूक किया जा सके। 2026 के अभियान में महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन के अलग-अलग चरणों में ब्लड क्लॉट के जोखिम पर खास ध्यान दिया जा रहा है।

थ्रोम्बोसिस की स्थिति में ब्लड वेसेल्स के अंदर खून का थक्का बन जाता है, जिससे ब्लड फ्लो सामान्य रूप से न होकर बाधित हो जाता है। यह थक्का नसों या धमनियों में बन सकता है। इसके कारण से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

महिलाओं में ब्लड क्लॉट का खतरा क्यों अधिक है?

महिलाओं में जीवन के अलग-अलग चरणों में हार्मोनल बदलाव और कुछ दवाएं ब्लड क्लॉट के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

गर्भावस्था और डिलीवरी के बाद

महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रुप से गर्भावस्था के दौरान शरीर में ऐसे बदलाव होते हैं जो प्रसव के दौरान ज्यादा खून बहने से बचाव करते हैं, लेकिन इसी कारण से खून के थक्के बनने का जोखिम भी बढ़ जाता है। डिलीवरी के बाद शुरुआती तीन महीनों तक जोखिम बना रहता है।

हार्मोनल गर्भनिरोधक

एस्ट्रोजन वाली कुछ गर्भनिरोधक गोलियां, पैच और अन्य हार्मोनल ट्रीटमेंट्स ब्लड क्लॉट का खतरा बढ़ाते हैं। हालांकि, हर महिला का जोखिम एक जैसा नहीं होता।

लंबे समय तक बैठे रहना

लगातार कई घंटों तक बैठे रहने, लंबी यात्रा करने या बीमारी के कारण बिस्तर पर रहने से भी ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है, इससे शरीर में झुनझुनाहट व चक्कर आने जैसी स्थिति सामान्य तौर पर देखने को मिलती है।

सर्जरी और कुछ बीमारियां

बड़ी सर्जरी, कैंसर, हृदय या फेफड़ों से जुड़ी कुछ बीमारियां और पहले ब्लड क्लॉट होने का इतिहास भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं।

ब्लड क्लॉट के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

ब्लड क्लॉट के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि थक्का शरीर के किस हिस्से में बना है। पैरों की नसों में बनने वाले थक्के को डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) कहा जाता है। जिसके लक्षण कुछ इस प्रकार से हैं-

  • एक पैर या हाथ में असामान्य सूजन

  • प्रभावित हिस्से में दर्द या छूने पर संवेदनशीलता

  • त्वचा का गर्म महसूस होना

  • त्वचा का लाल या बदरंग पड़ना

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सांस लेने में परेशानी हो तो क्या करें?

कभी-कभी खून के थक्के का एक हिस्सा टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। इसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहते हैं। यह जानलेवा स्थिति हो सकती है। इसके लक्षणों में अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द, खांसी के साथ खून आना, दिल की धड़कन तेज होना या बेहोशी जैसा महसूस होना शामिल हैं।

ब्लड क्लॉट से बचाव के लिए क्या करें?

ब्लड क्लॉट के हर मामले को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ उपाय जोखिम कम करने में मदद कर सकते हैं।

  • लंबे समय तक लगातार बैठे न रहें। यात्रा के दौरान, यदि संभव हो, तो हर एक से दो घंटे में उठकर चलें।

  • बैठे-बैठे पैरों और टखनों को हिलाते रहें।

  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें और लंबे समय तक यूं ही शिथिल रहने से बचें।

  • सर्जरी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में डॉक्टर से ब्लड क्लॉट के जोखिम और बचाव के उपायों पर बात करें।

  • गर्भावस्था, प्रसव के बाद या हार्मोनल दवाएं लेने की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें।

  • डॉक्टर की सलाह के बिना खून पतला करने वाली दवाएं शुरू न करें।

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