

Highlights
अस्पतालों के मानमानी पर लगेगा लगाम
विदेशों से आने वाले मरीजों को भी मिलेगा लाभ
अस्पतालों को इलाज की रकम सार्वजनिक करना हुआ अनिवार्य
Government Curbs Arbitrariness Of Hospitals: अस्पतालों में इलाज को लेकर एक शिकायत लगातार सामने आती रहती है। वो शिकायत जुड़ी होती है, किसी भी प्रकार की बिमारी के इलाज के दौरान खर्च होने वाली धनराशि से। सीधा-सीधा तात्पर्य है किसी भी प्रकार की बिमारी के इलाज का जो दर होता वो पारदर्शी नहीं होता है। इसको लेकर केन्द्र सरकार ने सख्ती दिखाते हुए साफ निर्देश दिया है कि सभी क्लिनिकों में रोग के इलाज के लिए निर्धारित शुल्क को पारदर्शी किया जाए। जिससे मरीजों और उनके परिजनों को सहुलियत मिले।
सरकार के इस पहल को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को इस बारे में पत्र जारी किया है। श्रीमती श्रीवास्तव ने कहा कि इलाज की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होने से मरीजों और उनके परिजनों को उपचार पर होने वाले संभावित खर्च का अनुमान लगाने, सही निर्णय लेने और चिकित्सा खर्च की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
नरेंद्र मोदी सरकार के इस पहल का लाभ देश के निचले तबके की आबादी के साथ-साथ मध्यमवर्गीय और उच्चवर्गीय सभी को होने वाली है। किसी भी रोग के इलाज की पारदर्शीता का लाभ अस्पताल द्वारा लिए जाने वाले शुल्क में भी देखने को मिलेगा। कोई अस्पताल मनमानी पैसा नहीं वसूल सकेगा और साथ ही मरीजों और अस्पताल के बीच होने वाला टकराव की स्थिति पर भी नियंत्रण आएगा।
यह पहल भारत सरकार की हेल्थकेयर सेवा को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और मरीजों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि हेल्थकेयर के खर्चों के बारे में साफ जानकारी मिलना मरीज-केंद्रित देखभाल का एक अहम हिस्सा बन जाए।
एक ही बिमारी के इलाज के लिए अलग-अलग दर अस्पताल तय करके रखते हैं। इलाज का शुल्क सार्वजनिक न होने से जैसा अस्पताल वैसा शुल्क लिया जाता है। कई बिमारियों के इलाज में आम आदमी की जमा-पूंजी खत्म हो जाती है।
इसको लेकर सरकार ने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010' और 'क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (सेंट्रल गवर्नमेंट) रूल्स, 2012 के तहत बदलाव किया है।
बदलाव के तहत ही अब बिमारी के इलाज में लगने वाली दरों को पारदर्शी करने का निर्देश जारी हुआ है। प्राइवेट अस्पतालों पर सरकार के इस नियम का क्या असर पड़ेगा इसको लेकर जब हमनें चिकित्सा विभाग से जुड़े व्यक्ति से बात की तो उन्होंने अपना मत सामने रखा।
उन्होंने कहा कि सरकार का यह कदम सराहनीय है। उन्होंने आगे कहा सभी तरह के बिमारी के इलाज के लिए जो खर्चें हो उसका सार्वजनिक होना जरूरी है।
चिकित्सा विभाग से जुड़े वरिष्ठ-डॉ धनन्जय सिंह
भारत में उपचार के लिए आयुष वीजा पर विदेशों से आने वाले मरीजों के लिए पैकेज दरें पारदर्शी तरीके से प्रदर्शित करने की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मरीजों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील बनाना है।