

World Sjogren's Day: हर साल 23 जुलाई को वर्ल्ड स्जोग्रेन डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को इस सिंड्रोम के बारे में जागरूक करना है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित होता है। इस बीमारी में शरीर की स्वस्थ ग्रंथियां डैमेज हो जाती है।
इस बीमारी की वजह से सबसे पहले आंखों और मुंह में सूखापन महसूस होता है, लेकिन समय के साथ यह शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।
स्जोग्रेन सिंड्रोम एक पुरानी ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की लार और आंसू बनाने वाली ग्रंथियां ठीक से काम नहीं कर पातीं है। इसी कारण से इस बीमारी से जूझ रहे मरीजों को बार-बार आंखों में जलन, मुंह सूखना और पानी की कमी जैसी समस्याएं होती हैं। यह बीमारी महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है। खासकर यह 40 वर्ष की उम्र के बाद के लोगों में अधिक देखी जाती है।
फिलहाल स्जोग्रेन सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही दवाओं और जीवनशैली में बदलाव से इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार आई ड्रॉप्स, कृत्रिम लार, दर्द कम करने वाली दवाएं या इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाली दवाइयां प्रीस्क्राइब करते हैं।
हर साल 23 जुलाई को यह दिवस स्वीडिश नेत्र विशेषज्ञ डॉ. हेनरिक स्जोग्रेन की जयंती पर मनाया जाता है। उन्होंने सबसे पहले इस बीमारी की पहचान की थी। इस दिन का उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना, समय पर पहचान और सही इलाज के महत्व को बताना है।