

Nutritious And Healthy Dal: भारतीय रसोई में दालों का विशेष स्थान है। सादी दाल हो या सब्ज़ियों और हरी पत्तेदार सब्ज़ियों के साथ बनी दाल, या फिर घी में तड़का लगी सुगंधित दाल, हर रूप में दाल भारतीय भोजन में शाम्ल की जाती है।
दाल-रोटा या दाल-चावल हर किसी का कम्फर्ट फूड है। दक्षिण भारत में सांभर के लिए तूअर दाल, महाराष्ट्र में आमटी, गुजरात में खट्टी-मीठी दाल, हर क्षेत्र में दाल को बनाने का अपना तरीका है। दाल को त्योहार और आय़ोजन के अनुसार भी अलग-अळग तरीके से बनाया जाता है।
वेजिटेरियन के लिए दाल प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है औऱ दाल में भरपूर मात्रा में पोषक त्तव पाए जाते हैं।
मूंग दाल का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है, क्यों कि यह बेहद सुपाच्य होता है। साबुत या धुली मूंग में मैंगनीज़, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक, फोलेट, प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। 100 ग्राम पके हुए दाल में 10-11 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।
उड़द दाल साबुत या धुली दोनों रूपों में खाई जाती है। इसका इस्तेमाल दाल मखनी से लेकर इडली, डोसा, वड़ा में किया जाता है। उड़द दाल स्वाद और पोषण से भरपूर है। इसमें प्रोटीन, पोटैशियम, कैल्शियम, आयरन और विटामिन A व C होते हैं। इशमें 12-14 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।
तुअर दाल भारतीय रसोई में रोजाना बनाई जाने वाली दाल है। दक्षिण भारत में तुअर दाल से ही सांभर बनाई जाती है। इसमें प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, मैग्नीशियम और बी-विटामिन होते हैं। 100 ग्राम पके हुए तुअर दाल में 15-20 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।
चना दाल पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इससे पकौड़े, सूप, सलाद और करी बनाई जाती है। इसमें प्रोटीन, फोलेट, जिंक, कैल्शियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं। इसके 100 ग्राम पके हुए दाल में 12 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है।
मसूर दाल भारतीय घरों में आमतौर पर बनाई जाती है और सब्ज़ियों के साथ बहुत स्वादिष्ट लगती है। यह झटपट बनने वाली दाल है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फोलेट और बी-विटामिन होते हैं।
कुल्थी का दाल जिसे हॉर्स ग्राम भी कहा जाता है, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है। इसका उपयोग पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग अधिक करते हैं। चूंकि इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे ठंड के मौसम में अधिक खाया जाता है।
| दाल | प्रोटीन (प्रति 100 ग्राम) |
| सोयाबीन | 10.6 |
| हरी दाल | 8.8 |
| पीली दाल | 8.4 |
| राजमा | 8.3 |
| हरे/ सूखे मटर | 7.9 |
| लोबिया | 7.8 |
| मसूर दाल | 7.7 |
| छोले | 7.6 |
| मूंग दाल | 7.6 |
| काला चना | 6.1 |
| उड़द दाल | 13 |
इसके अलावा भारत में राजमा, छोले, मटकी, चवली, सोयाबीन, लोबिया, काला चना जैसी अनगिनत प्रकार की दालें है। खाने में दालों को हमेशा बदल-बदल कर खाना चाहिए। इससे स्वाद व सेहत दोनों अच्छी बनी रहती है। दाल में फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो पाचन का सुधार करती है और कब्ज को दूर करती है। दाल में विटामिन बी, फोलेट, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स और विटामिन्स होते हैं। साथ ही, इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।