

Yoga And Pregnancy: योग शब्द संस्कृत के युज शब्द से बना है, जिसका अर्थ है जोड़ना या एक करना। योग का काम मन, शरीर और श्वास के बीच संतुलन स्थापित करना है। योग हमारे नर्वस सिस्टम को शांत करता है। योग कई सारी शारीरिक और मानसिक समस्याओं में अहम भूमिका निभाता है।
किसी महिला के गर्भ धारण करने की क्षमता केवल बायोलॉजिकल नहीं होती है, बल्कि यह शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य, संतुलन और नए जीवन को धारण करने की तैयारी का भी संकेत है। इंफर्टिलिटी केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि मानसिक तनाव और शारीरिक असंतुलन का परिणाम होता है।
कई शोध बताते हैं कि योग प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यह बात समझनी होगी कि योग फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का विकल्प नहीं है, बल्कि यह शरीर को गर्भधारण के लिए तैयार करता है। शरीर की प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है, ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और मानसिक तौर पर भी मजबूती देता है।
तनाव के दौरान शरीर में HPA Axis सक्रिय हो जाता है, जिससे कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं। कॉर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक अधिक रहने पर यह मस्तिष्क में GnRH हार्मोन के स्राव को प्रभावित कर सकता है, जिससे LH और FSH हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है। इसका असर महिलाओं के ओवरी और पुरुषों के टेस्टिकल्स की कार्यक्षमता पर पड़ता है।
योगा वागस नर्व को सक्रिय करती हैं, जिससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। नियमित योग करने से कॉर्टिसोल का स्तर कम होता है और मस्तिष्क में BDNF यानी Brain-Derived Neurotrophic Factor बढ़ता है, जिससे महिलाओं में हार्मोन का संतुलन बेहतर ढंग से होता है।
इस आसन के करने से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और कूल्हे के जोड़ों को खोलने में मदद करता है।
यह एकमात्र ऐसा आसन माना जाता है जिसे भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इससे पाचन बेहतर होता है और पेल्विक में रक्त प्रवाह बढ़ता है।
यह कूल्हों में लचीलापन लाने और कमर दर्द कम करने में मदद कर सकता है। गर्भावस्था में इसे केवल प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में करना चाहिए।
यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को आराम देने और शरीर को प्रसव की तैयारी में मदद करता है।
यह कूल्हों के जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
सुप्तबद्ध कोणासन और अर्ध तितली आसन जैसे योगासन कूल्हों को खोलने में मदद करते हैं, जिससे गर्भाशय और अंडाशय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बेहतर होता है। इससे यूटेरस की लाइनिंग स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिलती है।
कुछ अध्ययनों के अनुसार, नियमित योग से प्रजनन अंगों में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है, जिससे गर्भ धारण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है। करने में सहायक हो सकता है, जिससे गर्भधारण के लिए अनुकूल वातावरण बनने में मदद मिलती है।
नियमित योग करने से ब्लड शुगर और एंड्रोजन के स्तर को संतुलित करने में मदद मिल सकती है, इससे मासिक धर्म चक्र नियमित होती है और पीएमओएस की समस्या में आराम मिलता है।