

Menstrual Health Tips: पीरियड्स महिलाओं के शरीर में होने वाली एक नेचुरल प्रक्रिया है, जिसमें एक महिला का शरीर हर महीने गर्भावस्था के लिए तैयारी होता है। यह चक्र पीरियड्स के पहले दिन से शुरू होकर अगले पीरियड्स से एक दिन पहले तक चलता है। आमतौर पर इसे 28 दिनों का चक्र माना जाता है, लेकिन हर महिला का साइकल अलग हो सकता है और इसकी अवधि हर माह बदल भी सकती है।
मासिक धर्म चक्र को मुख्य रूप से चार अवस्थाओं में बांटा जाता है- मासिक धर्म, फॉलिक्युलर स्टेज, ओव्यूलेशन स्टेज और ल्यूटियल स्टेज। इन सभी स्टेजेज में शरीर के हार्मोन और रीप्रोडक्शन सिस्टम में अलग-अलग बदलाव होते हैं।
मासिक धर्म का पहला स्टेज पीरियड्स शुरु होने का पहला दिन होता है। अगर पिछले चक्र में गर्भधारण नहीं हुआ है, तो एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है। इसके कारण गर्भाशय की अंदरूनी लेयर, जिसे एंडोमेट्रियम कहते हैं, टूटने लगता है और यही बल्ड के जरिए बाहर निकलता है। इस दौरान पेट में दर्द या ऐंठन, कमर दर्द, थकान, सिरदर्द, मूड स्विंग और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
यह चरण भी पीरियड्स के पहले दिन से शुरू होता है और ओव्यूलेशन तक चलता है। इस दौरान ब्रेन से फॉलिकल-स्टिमुलेटिंग हार्मोन यानी FSH निकलता है, जो अंडाशय में मौजूद छोटे-छोटे फॉलिकल्स के विकास को बढ़ावा देता है। इनमें से आमतौर पर एक फॉलिकल मुख्य होता है, जो अंडे का मेच्योर करने में मदद करता है। इस दौरान एस्ट्रोजन लेवल बढ़ता है, जिससे गर्भाशय की अंदरूनी परत दोबारा मोटी होने लगती है ताकि महिला का शरीर प्रेगनेंसी के लिए तैयार हो सके।
ओव्यूलेशन वह अवस्था है, जब अंडाशय से एक मेच्योर अंडा बाहर निकलता है। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण होती है। 28 दिनों के साइकल में ओव्यूलेशन अक्सर बीच के दिनों में होता है, लेकिन इसका सही समय हर महिला में अलग हो सकता है।
ओव्यूलेशन के आसपास गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है। कुछ महिलाओं को इस समय पारदर्शी और खिंचाव वाला डिस्चार्ज, पेट के एक तरफ हल्का दर्द या यौन इच्छा में बदलाव महसूस हो सकता है।
ओव्यूलेशन के बाद खाली हुआ फॉलिकल कॉर्पस ल्यूटियम में बदल जाता है। यह मुख्य रूप से प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बनाता है, जो गर्भाशय की अंदरूनी परत को संभावित गर्भावस्था के लिए तैयार करने में मदद करता है। अगर अंडे का फर्टिलाइजेशन होकर गर्भावस्था शुरू हो जाती है, तो शरीर यूटेरस की लेयर को बनाए रखता है। वहीं, गर्भधारण नहीं होने पर कॉर्पस ल्यूटियम धीरे-धीरे खत्म हो जाता है और एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन का स्तर गिरने लगता है। इसके बाद गर्भाशय की परत टूटकर बाहर निकलती है और अगला पीरियड शुरू हो जाता है।
मासिक धर्म → फॉलिक्युलर चरण → ओव्यूलेशन → ल्यूटियल चरण → फिर मासिक धर्म
यानी मासिक धर्म चक्र एक लगातार चलने वाली नेचुरल प्रक्रिया है, जिसमें हार्मोन, ओवरीज और यूटेरस मिलकर संभावित गर्भावस्था की तैयारी करते हैं। अगर पीरियड्स लगातार बहुत अनियमित हों, अत्यधिक ब्लड डिस्चार्ज हो, बहुत तेज दर्द हो या मेंस्ट्रुअल साइकल में अचानक बड़ा बदलाव आए, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।