कंधों और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है ये आसन, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

Kukkutasana benefits in Hindi: शरीर को मजबूती प्रदान करते हैं, बल्कि आंतरिक रूप से ऊर्जा भी जागृत करते हैं। इनमें योगासन में से एक कुक्टासन यानि मुर्गा आसन सब आसन में से बेस्ट है।
जानिए 'कुक्कुटासन' के कमाल के फायदे
कुक्कुटासन (सौ.सोशल मीडिया)
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Benefits of Kukkutasana: सर्दियों का सीजन चल रहा है इस सीजन में शरीर को मजबूत रखने के लिए योगासन पर जोर दिया जाता है। ऐसे कई सारे आसन हैं, जो न केवल शरीर को मजबूती प्रदान करते हैं, बल्कि आंतरिक रूप से ऊर्जा भी जागृत करते हैं। इनमें योगासन में से एक कुक्टासन यानि मुर्गा आसन सब आसन में से बेस्ट है। इस योगासन को नियमित करने से शरीर को बैलेंस बनाने के साथ ही कंधों और पेट की मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

जान लीजिए कैसा है ये आसन

योगासन में से एक आसन की बात करें तो, 'कुक्कुटासन' एक संस्कृत शब्द है, जिसमें 'कुक्कुट' का अर्थ होता है 'मुर्गा' और 'आसन' का अर्थ होता है 'मुद्रा'। इस आसन को करते समय शरीर मुर्गे की तरह दिखता है, जिस वजह से इस आसन को 'कुक्कुटासन' कहते हैं। इस आसन को करने में थोड़ी परेशानी आती है लेकिन नियमित अभ्यास करने से शरीर को कई सारे लाभ मिलते है। केवल पेट या कंधों के लिए नहीं शरीर को लचीला बनाने और दिल के लिए भी आसन बेहतर होता है।

जानें योगासन करने का तरीका

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योगा मैट पर पद्मासन की मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद अपने दाएं हाथ को धीरे-धीरे दाईं जांघ और पिंडली के बीच से निकालें और बाद में यही प्रक्रिया को बाएं हाथ के साथ दोहराएं। दोनों हथेलियों को मजबूती से जमीन पर टिका दें और ध्यान रखें कि हथेलियों के बीच लगभग 3 से 4 इंच का फासला हो। अब गहरी सांस भरते हुए हथेलियों पर दबाव डालें और पूरे शरीर को जमीन से ऊपर उठाएं। इस दौरान आपकी गर्दन सीधी और आंखें सामने की ओर केंद्रित होनी चाहिए। इस मुद्रा में 15 से 20 सेकंड तक रहें और फिर धीरे-धीरे शरीर को नीचे लाकर पद्मासन की स्थिति में वापस आ जाएं।

शरीर और मन होता है संतुलित

आयुष मंत्रालय ने कुक्टासन को एक शक्तिशाली योगासन बताया है, जो शरीर और मन को संतुलित करता है। इस आसन को करने पर पूरा शरीर आपकी हथेलियों और बाजुओं के बल पर टिकता है। अगर आप इस आसन को नियमित रूप से करते है पेट की चर्बी तो कम होती है पाचन तंत्र को भी मजबूती मिलती है। इस योगासन को करने से रीढ़ की हड्डी लचीली होती है और शरीर में रक्त संचार बढ़ता है। साथ ही मानसिक रूप से यह एकाग्रता और ध्यान लगाने में भी मदद करता है। नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता में कमी आती है। इसके अलावा, यह कलाई और कोहनी के जोड़ों को मजबूती देता है। ध्यान रहें कि, गर्भवती महिलाओं और हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को भी इसे करने से बचना चाहिए। शुरुआती लोगों को योग प्रशिक्षक की देखरेख में इसका अभ्यास शुरू करना चाहिए।

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