सुबह उठते ही होता है गर्दन और सिर में दर्द? कहीं आपका तकिया तो नहीं बन रहा बीमारियों का घर

Pillow Hygiene Tips: सुबह उठते ही गर्दन और सिर में दर्द होना एक आम समस्या बनती जा रही है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। कई बार इसका कारण गलत तकिया या सोने की गलत पोजीशन हो सकती है।
Morning Neck And Head Pain Causes
पिल्लो पकड़कर सोता हुआ व्यक्ति (सौ. फ्रीपिक)
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Health Risks of Old Pillows: हम अक्सर अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए खान-पान और कसरत पर ध्यान देते हैं। अच्छी नींद के लिए हम महंगे गद्दे और शांत कमरे का चुनाव भी करते हैं लेकिन एक छोटी सी चीज जिसे हम सबसे ज्यादा नजरअंदाज करते हैं वह है हमारा तकिया। वैज्ञानिक रिसर्च और एक्सपर्ट के अनुसार एक गलत या पुराना तकिया न केवल आपकी नींद की गुणवत्ता को खराब करता है बल्कि यह गर्दन, सिर दर्द और सांस की बीमारियों की सबसे बड़ी वजह बन सकता है।

रीढ़ की हड्डी और गर्दन का बिगड़ता संतुलन

मानव शरीर की बनावट ऐसी है कि सोते समय रीढ़ की हड्डी और गर्दन का एक सीधी रेखा में होना अनिवार्य है। जब तकिया पुराना हो जाता है तो वह अपना आकार और सपोर्ट खो देता है। यदि तकिया बहुत अधिक ऊंचा या बहुत पतला हो तो गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यही कारण है कि बहुत से लोग सुबह उठते ही गर्दन में अकड़न, कंधों में खिंचाव या सिर दर्द की शिकायत करते हैं। सही ऊंचाई वाला तकिया मांसपेशियों को आराम देता है और शरीर के पोश्चर को बिगड़ने से बचाता है।

सांस की समस्या

पुराना तकिया केवल शारीरिक दर्द ही नहीं बल्कि एलर्जी का भी घर होता है। समय के साथ तकिए के रेशों में पसीना, मृत त्वचा, और धूल जमा होने लगती है। रिसर्च के अनुसार ये चीजें डस्ट माइट्स को आकर्षित करती हैं। ये छोटे जीव नग्न आंखों से नहीं दिखते लेकिन ये अस्थमा, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी एलर्जी को ट्रिगर कर सकते हैं। भले ही आप कवर को कितना भी साफ रखें लेकिन तकिए के अंदरूनी हिस्से में जमा गंदगी पूरी तरह साफ नहीं हो पाती।

कब बदलें अपना तकिया

विशेषज्ञों का मानना है कि हर दो से तीन साल में तकिया बदल देना चाहिए लेकिन यह आपके तकिए के मटेरियल पर भी निर्भर करता है।

  • सिंथेटिक फाइबर: ये तकिए सस्ते होते हैं लेकिन जल्दी अपना आकार खो देते हैं। इन्हें हर 18 महीने में बदलना उचित है।
  • मेमोरी फोम: यह मटेरियल गर्दन के आकार के हिसाब से ढल जाता है और लंबे समय तक चलता है। इसे 3 साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • लेटेक्स: ये सबसे ज्यादा टिकाऊ होते हैं और सही देखभाल के साथ 4-5 साल तक साथ निभा सकते हैं।

सफाई और रख-रखाव के नियम

तकिए की उम्र बढ़ाने के लिए उसे समय-समय पर धोना जरूरी है लेकिन ध्यान रहे कि हर मटेरियल पानी के लिए नहीं बना होता। मेमोरी फोम या लेटेक्स को कभी भी मशीन में न धोएं इसके बजाय केवल उनके कवर को नियमित रूप से बदलें। सिंथेटिक तकियों को निर्देशानुसार धोया जा सकता है ताकि बैक्टीरिया और धूल के कणों को कम किया जा सके।

एक छोटा सा बदलाव आपकी सेहत और नींद को कई गुना बेहतर बना सकता है। यदि आपका तकिया मोड़ने पर वापस अपने आकार में नहीं आ रहा है तो समझ लीजिए कि अब इसे अलविदा कहने का समय आ गया है।

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