सावधान! महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं सर्वाइकल कैंसर के मामले, क्या आपको भी दिख रहे हैं ये लक्षण?

Cervical Cancer Symptoms: आजकल महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है जो एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बन चुका है। इससे जुड़े लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है।
Cervical Cancer Symptoms in Women
प्रतीकात्मक तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
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Women Health Alert: भारत में सर्वाइकल कैंसर अब केवल उम्रदराज महिलाओं तक सीमित नहीं रहा। भंगेल सीएचसी की सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. मीरा पाठक के अनुसार देश में हर आठ मिनट में एक महिला इस बीमारी से जान गंवा रही है। जागरूकता की कमी और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना इस मौत के आंकड़े को बढ़ा रहा है।

बढ़ रहा है खतरा?

सर्वाइकल कैंसर का मुख्य विलेन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) है। लगभग 95% मामले इसी वायरस के संक्रमण के कारण होते हैं। यह वायरस मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंधों के जरिए फैलता है। डॉ. पाठक के अनुसार जिन महिलाओं में सेक्सुअल एक्टिविटी जल्दी शुरू होती है या जिनके कई सेक्सुअल पार्टनर्स होते हैं उनमें इसका जोखिम काफी अधिक होता है। इसके अलावा कई बार गर्भधारण करना, स्मोकिंग और लंबे समय तक गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन भी इस कैंसर को दावत देता है।

सर्वाइकल कैंसर के लक्षण

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती संकेतों को अक्सर महिलाएं सामान्य समझ कर छोड़ देती हैं जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता है। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं-

  • असामान्य ब्लीडिंग: पीरियड्स के बीच में, संबंध बनाने के बाद या मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के बाद होने वाली ब्लीडिंग।
  • अजीब डिस्चार्ज: योनि से बदबूदार और पानी जैसा डिस्चार्ज होना।
  • पीठ और कमर दर्द: कैंसर बढ़ने पर लगातार पीठ, कमर या पैरों में दर्द रहना।
  • यूरिन की समस्या: पेशाब करने में परेशानी या बार-बार संक्रमण होना।
  • वजन कम होना: बिना किसी कारण के तेजी से वजन का घटना।

बचाव और इलाज

इस कैंसर से बचाव के दो सबसे मजबूत हथियार हैं स्क्रीनिंग और वैक्सीनेशन।

पैप स्मीयर टेस्ट (Pap Smear): समय-समय पर यह टेस्ट कराने से कैंसर होने से पहले की कोशिकाओं में बदलाव का पता चल जाता है।

HPV वैक्सीन: युवा लड़कियों और मध्य आयु वर्ग की महिलाओं को यह वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए जो भविष्य में कैंसर के खतरे को लगभग खत्म कर देती है।

इलाज की प्रक्रिया

यदि जांच (बायोप्सी) में कैंसर की पुष्टि होती है तो घबराने की जरूरत नहीं है। शुरुआती स्टेज में केवल सर्जरी (हिस्ट्रेक्टोमी) से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है। गंभीर स्थितियों में रेडिएशन और कीमोथेरेपी का सहारा लिया जाता है।

डॉक्टर की सलाह

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। यदि आपको शरीर में कोई भी असामान्य बदलाव दिखे तो तुरंत गायनेकोलॉजी विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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