क्या आपकी भी थोड़ा चलने के बाद फूलने लगती है सांस, इन बीमारियों के होते है संकेत, ऐसे रखें ख्याल

Winter Breathlessness Causes: सर्दियों में सांस फूलने की समस्या दिल, फेफड़ों या ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकती है। जानिए आयुर्वेदिक उपाय, काढ़ा, प्राणायाम और सही डाइट से राहत के तरीके के बारे में।
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सांस फूलने की आदत (सौ.सोशल मीडिया)
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Ayurvedic Remedies For Breathlessness: आजकल हर किसी की जीवनशैली में बदलाव हो गया है जहां पर लोग थोड़ी सी दूरी के लिए भी गाड़ी या कार को लेना पसंद करते है। पैदल कम चलने की आदत से थोड़ा सा ज्यादा चलने पर भी थक जाते है। वहीं पर चलने के अलावा सीढ़ियों पर चढ़ने पर भी सांस फूल जाती है। यहां पर सांस फूलना सिर्फ कमजोरी का लक्षण नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का संकेत है। सर्दियों में सांस फूलने की परेशानी सबसे ज्यादा होती है।

ये होते है लक्षण

यहां पर सर्दियों के मौसम में सेहत में बुरा असर देखने के लिए मिलता है। इसमें दिल, फेफड़ों या रक्त में ऑक्सीजन की कमी होती है। वातावरण में मौजूद ठंडी हवा फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को सिकुड़ने का काम करती है। जहां पर अगर थोड़ा सा भी चलने लगते है तो कई तरह के बदलाव देखने के लिए मिलता है।जिससे चलते-चलते गले में रूखापन, हांफना और थकान महसूस होने लगती है, लेकिन ये कमजोर दिल, फेफड़ों की कमजोरी और थायरॉयड का असंतुलन दिखाता है। कभी-कभी ये लक्षण खून की कमी की तरफ भी इशारा करते हैं। अगर आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं तो आयुर्वेद में उसके उपाय भी बताए गए हैं।

इन आयुर्वेदिक उपायों को अपनाना जरूरी

आप अगर सर्दी-जुकाम की समस्या से जूझ रहे है तो आपको यहां पर बताए जा रहे आयुर्वेदिक उपायों को अपनाना चाहिए जो इस प्रकार है...

1- सर्दियों के मौसम में आप सर्दी-जुकाम की समस्या को सही करने के लिए रात में भिगोई मेथी को सुबह गुड़ के साथ लेना शुरू कर दें। इन दोनों चीजों का मिश्रण फेफड़ों को मजबूती प्रदान करता है और सर्द हवा भी फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचा पाती।

2-सर्दियों में अगर आप तुलसी और लौंग के काढ़े का सेवन करते है तो आराम मिलता है। सुबह के समय तुलसी, अदरक और लौंग का काढ़ा बनाकर लिया जाए तो फेफड़ों की सिकुड़न कम होती है और ऑक्सीजन का प्रवाह तेज होता है, जिससे फेफड़े सही तरीके से काम करना शुरू कर देते हैं।

3-शहद और अदरक के रस का सेवन भी किया जा सकता है। इससे कफ कम होगा और सांस लेने में परेशानी कम होगी।

तले-भुने खाने को लेने से करें परहेज

आपको यहां पर सांस की समस्या से बचने के लिए तले-भुने और मसालेदार खाने को अपनी डाइट से आपको हटा देना चाहिए। तला-भूना खाने से पेट और डायाफ्राम पर असर पड़ता है और डायाफ्राम फेफडों को संकुचित करने का काम करता है। इसलिए सात्विक भोजन और कम मसालेदार भोजन करना चाहिए।

इन एक्सरसाइज को करना होता है सही

यहां पर अगर आप फेफड़ों को स्वस्थ रखना चाहते है तो हार्मोन को संतुलित करने के लिए रोजाना नियमित रूप से प्राणायाम करना भी जरूरी होता है।रोजाना सुबह अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और डीप ब्रीदिंग का अभ्यास करें। इससे शरीर में ऑक्सीजन लेवल बढ़ाता है, श्वसन नलिकाएं शांत रहती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है। साथ ही कोशिश करें कि पूरे दिन गुनगुना पानी पीएं। इससे फेफड़ों में होना वाला संक्रमण कम होता है।

आईएएनएस के अनुसार

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