

Hartalika Teej Vrat ka Paran 2026: हरतालिका तीज का व्रत महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। लेकिन इस व्रत के दौरान स्वंय का भी ख्याल रखना उतना ही जरूरी है। पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद जैसे ही पारण का समय आता है, तो सबसे पहले प्यास लगता है और मन करता है कि खूब पानी पिएं और सामने जो भी खाना हो, खा लें।
लंबे समय तक बिना पानी और भोजन के रहने के बाद शरीर को अचानक बहुत ज्यादा पानी या भारी खाना देने के बजाय धीरे-धीरे सामान्य रूटीन पर लाने की कोशिश करनी चाहिए। लंबे निर्जला व्रत के बाद बहुत बड़ामील लेने से बचना चाहिए। इससे पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
पारण के बाद पानी पीना जरूरी है, लेकिन एक ही बार में बहुत ज्यादा पानी पीने की जरूरत नहीं है। कुछ देर में धीरे-धीरे पानी लें और शरीर को फ्लूड्स एब्जॉर्ब करने का समय दें। बहुत कम समय में जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं है, क्योंकि अत्यधिक पानी से शरीर का सोडियम बैलेंस बिगड़ सकता है।
पूरे दिन कुछ नहीं खाने के बाद गरमा-गरम पूरी, पकौड़े, मिठाई और नमकीन जैसी चीजें न खाएं। शुरुआत में बहुत ज्यादा तला-भुना या भारी खाना पेट पर भारी पड़ सकता है। पहले थोड़ा हल्का भोजन लें और फिर अपनी भूख और डाइजेशन के हिसाब से नॉर्मल मील की तरफ जाएं।
हरतालिका तीज में मिठाई और प्रसाद का अपना महत्व है। इसलिए इसे पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन पूरे दिन के व्रत के बाद एक साथ बहुत सारी मिठाई खाने से बचें। पहले सामान्य खाना लें और मिठाई को छोटी मात्रा में एंजॉय करें।
व्रत खुलते ही कई लोगों को चाय या कॉफी की ललक होती है। लेकिन अगर शरीर पहले से डिहाइड्रेटेड है, तो लगातार चाय-कॉफी पीना हाइड्रेशन का विकल्प नहीं होना चहिए। पहले पानी और सामान्य भोजन पर ध्यान दें। उसके बाद अपनी डेली रूटीन पर लौटें।
एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीना। प्यास लगी है तो पानी धीरे-धीरे लें।
तुरंत भारी खाना न खाएं। पूरी, पकौड़े और बहुत ज्यादा तला खाना शुरुआत के लिए सही नहीं होता है।
मिठाई को खाने का रिप्लेसमेंट समझकर न खाएं। सीमित मात्रा में खाएं।
जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी पीने से बचें। इससे डिहाइड्रेशन बढ़ सकता है।
शरीर के संकेतों को समझना। चक्कर या बहुत ज्यादा कमजोरी हो तो ध्यान दें।
तुरंत भारी रूटीन शुरू करना। पारण के बाद थोड़ा आराम भी दें। शरीर को सामान्य खान-पान पर लौटने का समय दें।