हर मौके की शान बढ़ाने वाले गुलाम जामुन का विदेशी कनेक्शन, जानें फारस की खाड़ी से कैसे पहुंचा भारत
Gulab Jamun History: गुलाब जामुन भारत की सबसे पसंदीदा मिठाइयों में से एक है जो हर खास मौके की शान बढ़ाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इतिहास भारत से नहीं बल्कि फारस की खाड़ी से जुड़ा हुआ है।
- Written By: प्रीति शर्मा
चाशनी में डूबे गुलाब जामुन (सौ. एआई)
Gulab Jamun Origin: शादी हो या त्योहार गुलाब जामुन के बिना हर जश्न अधूरा है। लेकिन जिसे हम अपनी राष्ट्रीय मिठाई जैसा सम्मान देते हैं उसका असली घर सात समंदर पार ईरान में है। आखिर कैसे एक विदेशी डिश भारत की सबसे लोकप्रिय मिठाई बन गई। आइए जानते हैं इसका 500 साल पुराना इतिहास।
भारतीय थाली का गौरव कहा जाने वाला गुलाब जामुन सदियों से हमारे स्वाद का हिस्सा रहा है। लेकिन फूड हिस्टोरियंस की मानें तो यह मिठाई मूल रूप से मध्य पूर्व की देन है। फारस में इसे लुकमत-अल-कादी के नाम से जाना जाता था। हालांकि भारत आने के बाद इसके रूप और स्वाद में जो बदलाव हुए उसने इसे दुनिया भर में एक नई पहचान दिला दी।
शाहजहां के बावर्ची की गलती
एक प्रचलित लोककथा के अनुसार भारत में गुलाब जामुन का आविष्कार मुगल बादशाह शाहजहां के शासनकाल के दौरान हुआ था। कहा जाता है कि उनके शाही बावर्ची ने अनजाने में फारसी मिठाई लुकमत-अल-कादी बनाने की कोशिश की लेकिन भारतीय सामग्री और स्थानीय स्वाद के मिश्रण से एक नई डिश तैयार हो गई। जब बादशाह ने इसे चखा तो वे इसके दीवाने हो गए और धीरे-धीरे यह शाही महलों से निकलकर आम जनता की थाली तक पहुंच गई।
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कैसे पड़ा यह नाम
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि जब इस मिठाई में न तो गुलाब होता है और न ही जामुन तो फिर यह नाम क्यों। इसके पीछे फारसी भाषा का एक दिलचस्प गणित है।
गुलाब शब्द दो फारसी शब्दों गुल यानी फूल और आब यानी पानी से मिलकर बना है। चूंकि इस मिठाई की चाशनी में गुलाब जल का भरपूर इस्तेमाल किया जाता था और इससे फूलों जैसी महक आती थी इसलिए इसे गुल आब कहा गया।
चाशनी में डूबे गुलाब जामुन (सौ. एआई)
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जामुन के पीछे का कारण इसका आकार और रंग है। गहरे भूरे-बैंगनी रंग और गोल आकार की वजह से इसकी तुलना भारतीय फल जामुन से की गई। इस तरह गुल-आब और जामुन मिलकर बन गए गुलाब जामुन।
ईरानी लुकमत और भारतीय गुलाब जामुन में अंतर
ईरान में बनाई जाने वाली मूल मिठाई लुकमत-अल-कादी को मुख्य रूप से मैदे के घोल को तलकर और फिर शहद की चाशनी में डुबोकर बनाया जाता था। लेकिन भारत में इसमें खोया का इस्तेमाल शुरू हुआ जिससे इसका टेक्सचर और भी मखमली और स्वाद समृद्ध हो गया।
आज के दौर में गुलाब जामुन
आज भारत में इसकी अनगिनत किस्में मौजूद हैं। बंगाल का पंतुआ हो मध्य प्रदेश का काला जामुन या फिर राजस्थान के पनीर गुलाब जामुन हर राज्य ने इसे अपना एक अलग तड़का दिया है।
डिजिटल युग में भले ही हम नई-नई मिठाइयां देख रहे हों लेकिन गुलाब जामुन का आकर्षण आज भी बरकरार है। अगली बार जब आप एक गर्म-गर्म गुलाब जामुन का आनंद लें तो याद रखिएगा कि आप केवल एक मिठाई नहीं बल्कि 500 साल पुराना एक वैश्विक इतिहास चख रहे हैं।
