

Indian Forgotten Fruits: भारत के फलों के बाजार में अब आमतौर पर केला, सेब, संतरा, अनार और कुछ मौसमी फल मिल जाते हैं। लेकिन, हमेशा से यह तस्वीर केवल इन फलों तक सीमित नहीं था। देश के अलग-अलग हिस्सों में आज भी ऐसे कई देसी फल मिलते हैं, जो कभी गांवों और छोटे शहरों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन अब बाजारों में कम नजर आते हैं।
इसका कारण है इसके बारे में में जानकारी का न होना और इकसी उपजता में आई कमी। इन फलों में रामफल, करौंदा, लसोड़ा, फालसा और बेल जैसे नाम शामिल हैं। ऐसे ही कम चर्चित फलों में शामिल हैं।
इन फलों की खासियत केवल इनका अलग दिखना नहीं है बल्कि इनके साथ स्थानीय खान-पान, मौसम और पारंपरिक व्यंजनों की कहानियां भी जुड़ी हैं। आइए जानते हैं इन 5 देसी फलों के बारे में, जिन्हें अगली बार बाजार में दिखें तो नजरअंदाज न करें।
रामफल बाहर से कुछ हद तक सीताफल जैसा दिखाई देता है, लेकिन इसका स्वाद और बनावट अलग होता है। पकने के बाद इसका गूदा नरम और मीठा हो जाता है। यह मौसमी फल है और आम फलों की तरह हर बाजार में आसानी से नहीं मिलता। ग्रामीण और छोटे शहरों के बाजारों में रामफल आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है। इसका स्वाद चखने के लिए आपको थोड़ा इंतजार और सही मौसम का चुनाव करना होगा।
इसकी सेल्फ लाइफ बहुत कम होती है। अगर आपको कभी इसका स्वाद चखने का मौका मिले, तो इसे शहद और भुने हुए सौंफ के पाउडर के साथ खाएं। बिल्कुल नेचुरल कुल्फी का स्वाद देगा।
करौंदा अपने खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है। कच्चे करौंदे का इस्तेमाल भारतीय घरों में अचार, चटनी और सब्जी बनाने में भी किया जाता है। पकने पर इसका रंग बदलता है और स्वाद में भी मिठास आने लगती है। करौंदे की सबसे दिलचस्प बात यही है कि यह सिर्फ फल की तरह नहीं, बल्कि भारतीय रसोई के एक पारंपरिक सामग्री के रूप में भी इस्तेमाल होता रहा है। इसमें विटामिन सी और आयरन भरपूर मात्रा में होता है।
लसोड़ा उन देसी फलों में है, जिन्हें शहरों में रहने वाली नई पीढ़ी शायद ही पहचान पाए। इसे कई जगह गोंदी के नाम से भी जाना जाता है। कच्चे लसोड़े का इस्तेमाल खासतौर पर अचार और पारंपरिक सब्जियों में किया जाता है। इसका स्वाद और इस्तेमाल इसे दूसरे आम फलों से बिल्कुल अलग बनाता है। यही वजह है कि स्थानीय बाजार में लसोड़ा दिखाई दे तो यह किसी पुराने स्वाद की याद दिलाता है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं।
छोटा, गहरे बैंगनी रंग का फालसा गर्मियों में मिलने वाला बेहद खास मौसमी फल है। इसका स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है और इससे पारंपरिक रूप से शरबत और दूसरे गर्मियों के पेय तैयार किए जाते हैं। आज जब बाजार में पैकेज्ड ड्रिंक्स की भरमार है, फालसे का शरबत भारतीय गर्मियों के उन देसी स्वादों की याद दिलाता है, जो कभी घरों में खूब पसंद किए जाते थे।
बेल भारत के सबसे पुराने और पारंपरिक फलों में गिना जाता है। इसका गूदा मीठा और सुगंधित होता है और गर्मियों में इससे बेल का शरबत बनाया जाता है। बेल का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। खासकर भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाया जाता है। यह फल भारतीय परंपरा में भोजन से कहीं आगे है। यह गर्मी का देशी ड्रिंक है, जो पाचन को बेहतर बनाता है।
इन देसी फलों की कहानी सिर्फ स्वाद की नहीं है। ये भारत की स्थानीय खाद्य विविधता और पारंपरिक खान-पान का हिस्सा हैं। मॉडर्नाइजेशन में इनकी जगह भले ही सीमित हो गई हो, लेकिन स्थानीय मंडियों में ये कभी-कभी मिल जाते हैं।