

Chickpea Curd Starter: सोशल मीडिया पर इन दिनों छोले यानी काबुली चने से दही जमाने या दही जैसा खमीर तैयार करने का एक तरीका चर्चा में है। यह प्रयोग खासतौर पर उन लोगों का ध्यान खींच रहा है जो दूध से अलग विकल्प तलाशते हैं यानी जो लैक्टोज इंटोलरेंट है। अब सवाल यह है कि क्या छोले से तैयार किया गया मिश्रण सच में दही की तरह काम करता है और क्या इसे रोजाना इस्तेमाल करना सुरक्षित है?
वायरल तरीके में भीगे हुए छोलों का इस्तेमाल किया जाता है। छोलों को कुछ घंटों या रातभर पानी में भिगोने के बाद पीसकर उनका गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है, इसके बाद इसे ढककर कुछ समय के लिए रूम टेंपरेचर पर रखा जाता है।
इस दौरान प्राकृतिक रूप से मौजूद छोटे-छोटे जीवाणु फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू करते हैं। जब इसमें खट्टापन आ जाता है, तो यह तैयार माना जाता है।
फर्मेंटेशन की प्रक्रिया में जीवाणु भोजन में मौजूद कुछ कार्बोहाइड्रेट और अन्य घटकों को बदलते हैं। इससे स्वाद और बनावट में बदलाव आता है। चने में मौजूद फाइबर और पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व इसे फर्मेंटेड फूड बनाते हैं।
दूध से बने दही में प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व अधिक होते हैं, जब कि काबुली चने से बने जमावन में पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, फाइबर, आयरन और फोलेट मिलते हैं। हालांकि इसे दही का विकल्प नहीं समझा जाना चाहिए।
घर पर किसी भी खाद्य पदार्थ को फर्मेंटेशन करते समय स्वच्छता बेहद जरूरी है। साफ बर्तन, साफ पानी और उचित तापमान का ध्यान रखना चाहिए। यदि तैयार मिश्रण में-
फफूंद दिखाई दे
असामान्य रंग आ जाए
बहुत तेज या सड़ी हुई गंध आए
बनावट असामान्य हो जाए
तो इसे बिल्कुल इस्तेमाल न करें।
चने में मौजूद फाइबर और कुछ ऐसे कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जिन्हें कुछ लोगों को पचाने में परेशानी हो सकती है। ऐसे लोगों को चना खाने के बाद गैस, ब्लोटिंग या असहजता महसूस हो सकती है। इसलिए पहली बार इसे आजमाने पर कम मात्रा से शुरुआत करें।