

सर्दियों में ठंडी हवा और कम नमी के कारण त्वचा रूखी, बाल ड्राई और शरीर में सुस्ती महसूस होने लगती है।
आयुर्वेद के अनुसार खानपान, नींद और दिनचर्या बदलने की सलाह दी जाती है।
गर्म और पौष्टिक भोजन, नियमित योग, तेल मालिश और सही स्किन व हेयर केयर से सर्दियों में सेहत का ध्यान रखा जा सकता है।
Ayurvedic Winter Care: सर्दियों का मौसम आते ही कई चीजों में बदलाव आने लगते हैं। सुबह की धूप सुहानी लगने लगती है, बिस्तर से निकलने का मन नहीं करता, प्यास कम लगती है और खानपान से लेकर सोने-जागने तक का समय बदल जाता है। इसका असर सिर्फ हमारी एनर्जी पर ही नहीं बल्कि त्वचा और बालों की सेहत पर भी पड़ता है।
किसी की त्वचा खिंची-खिंची और बेजान लगने लगती है, तो किसी के बाल रूखे होकर टूटने लगते हैं। ऐसे में सर्दियों के दौरान अपनी डेली रूटीन में बदलाव की जरूरत है। आयुर्वेद में मौसम के अनुसार खानपान और दिनचर्या में बदलाव करने की सलाह दी गई है।
सर्दियों में तापमान गिरने और दिन छोटे होने का असर शरीर के काम करने के तरीके पर पड़ता है। ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं, जिससे कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। कम धूप मिलने और दिनचर्या बदलने से नींद के पैटर्न और ऊर्जा के स्तर पर भी असर पड़ता है।
इस मौसम में लोग घर के अंदर अधिक समय बिताते हैं। इससे शारीरिक गतिविधियां कम होने लगती हैं और इंफेक्शन भी अधिक फैलता है।
ठंड के मौसम में त्वचा से नमी चली जाती है और स्किन ड्राई होने लगती है। कम नमी के कारण त्वचा रूखी, पपड़ीदार और खुजली होने लगती है। बालों में नमी कम होने से वे बेजान और कमजोर लगते हैं। स्कैल्प में रूखापन और खुजली भी बढ़ सकती है।
ठंड के मौसम में गर्म और ताजा बना खाना खाने से शरीर को आराम मिलता है। अपनी डाइट में बाजरा, ज्वार, गेहूं और चावल जैसे अनाज शामिल करें। गाजर, चुकंदर, शकरकंद और दूसरी मौसमी सब्जियों को भोजन का हिस्सा बनाएं।
खाने के साथ-साथ बादाम, अखरोट, खजूर और अंजीर भी लिए जाने चाहिए, इससे शरीर में गरमाहट बनी रहती है। ये पोषक तत्व और ऊर्जा के अच्छे स्रोत हैं। खाना बनाने में जरूरत के अनुसार घी और तिल के तेल का इस्तेमाल करें।
सर्दियों में अदरक, हल्दी, दालचीनी, इलायची और काली मिर्च जैसे मसालों का इस्तेमाल अधिक करना चाहिए। इन्हें सूप, खिचड़ी, दलिया और सब्जियों में इस्तेमाल किया जा सकता है।