सांकेतिक फोटो (सोर्स आईएएनएस) 
जम्मू कश्मीर

'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्‍मू-कश्‍मीर' किताब पर मचा बवाल; पुलिस ने शुरू की बड़ी कार्रवाई

Separatist Glorification: जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों के महिमामंडन के आरोप वाली किताब पर एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने प्रकाशकों के कई ठिकानों पर छापेमारी कर जांच तेज कर दी है।

वंदना शर्मा

Jammu Kashmir Book FIR: जम्मू-कश्मीर में एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है और जब पता चला कि सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी के लिए एक किताब में इस इलाके को भारत के नियंत्रण वाला कश्मीर बताया गया था। यहां तक कि प्रतिबंधित JKLF के संस्थापक मकबूल भट को शहीद भी बताया गया था।

शिक्षा मंत्री सकीना इटू के इस्तीफ़े की मांग की

इसी के दौरान विपक्षी BJP ने शिक्षा मंत्री सकीना इटू के इस्तीफ़े की मांग की, किताब पर तुरंत रोक लगाने और ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक कार्रवाई करने को कहा है। वहीं दूसरी तरफ उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के प्रशासन ने स्कूल शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया, लेखकों और पब्लिशर्स को ब्लैकलिस्ट कर दिया, सरकारी स्कूल की लाइब्रेरी से दो किताबें हटा लीं और उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए।

पुस्तकों पर अलगाववादियों का महिमामंडन करने का आरोप

जिन किताबों पर यह विवाद शुरू हुआ है, तो आपको बता दें कि उनमें से पहली किताब का नाम 'पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्‍मू-कश्‍मीर' है। बता दें कि इस पुस्तक के लेखक हिलाल अहमद और संतोष मीणा हैं। उन्होंने इसे ओबेरॉय बुक सर्विस, जम्मू में प्रकाशित किया है।

वहीं दूसरी किताब 'पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर', जिसके लेखक डॉ. सुशांत गिरी हैं और इसे अनुराग प्रकाशन, दिल्ली ने प्रकाशित किया है। इन पुस्तकों पर अलगाववादियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने का आरोप लगाया गया है।

जानें सरकारी आदेश में क्या लिखा था

बता दें, कि सरकारी आदेश के अनुसार, पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर जिलों में, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला जिलों में वितरित की गई थीं। सरकार का कहना तो यह भी है, कि इन पुस्तकों में ऐसी सामग्री शामिल है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है।

सरकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि पुस्तकों की सिफारिश करने वाली उपसमिति और संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारियों ने गंभीर लापरवाही बरती और आवश्यक सतर्कता दिखाई नहीं दे रही है। इसके चलते निलंबित अधिकारियों में फजिल इमरान सिद्दीकी, गुरजीत सिंह, संजीव शर्मा, शाजिया कौसर, इम्तियाज अहमद मीर, निरंजन शर्मा, रेनू मेंगी और राजमोहिनी शामिल हैं।

30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश

इसके अलावा, समग्र शिक्षा में अनुबंध पर कार्यरत कंप्यूटर असिस्टेंट शेख सुहेल अहमद की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। सरकार ने इस मामले की जांच के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अश्वनी कुमार को जांच अधिकारी और जेकेएएस अधिकारी रोहित शर्मा को प्रेजेंटिंग ऑफिसर नियुक्त किया है। जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

आपको बता दें कि चल रहे जम्मू के इस मामले में काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 49, 61(2), 152, 196 और 353 और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम की धारा 13 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इतने ही नही बल्कि जांच एजेंसियों ने प्रकाशकों के परिसरों पर भी छापेमारी कर अब तक फिजिकल और डिजिटल दोनों प्रकार के साक्ष्यों को जब्त कर लिया हैं।

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