मुखबिरों ने आजादी के बाद क्यों बनाया अपना गीत? 'वंदे मातरम' पर संसद में गरजे अखिलेश, देखें- Video

Parliament Winter Session: लोकसभा में "वंदे मातरम" पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रेसिडेंट और कन्नौज से सपा अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला किया।
Akhilesh Yadav on Vande Matram
लोकसभा में अखिलेश यादव (सोर्स- वीडियो)
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Akhilesh Yadav on Vande Matram: लोकसभा में "वंदे मातरम" पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रेसिडेंट और कन्नौज से सपा अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला किया। सदन में अपने भाषण के दौरान अखिलेश ने कहा कि वही "वंदे मातरम" गीत, जिसने आज़ादी की लड़ाई में पूरे देश को एक किया था, अब कुछ "दरारवादी" ताकतें इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर देश को बांटने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं।

अखिलेश ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि आज जब हम उनके भाषण सुनते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे उन्होंने वंदे मातरम लिखा हो। आज इतिहास खंगालने की ज़रूरत है। कुछ मुखबिरों से सवाल करना चाहिए। उन्होंने आजादी के बाद अपना खुद का गीत क्यों बनाया? उन्होंने तिरंगा क्यों नहीं फहराया? आज़ादी की लड़ाई के दौरान ये लोग कहां थे?" अखिलेश ने इनडायरेक्टली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमला किया।

अयोध्या में हुई सांप्रदायिकता की हार

लोकसभा में अपने भाषण के दौरान सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद का हाथ उठाते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश ने सांप्रदायिक राजनीति को हरा दिया है।" इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के सांसदों ने एक साथ पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) का नारा लगाया।

बाबा साहेब को लेकर साधा निशाना

अखिलेश ने आगे कहा, "उनका इतिहास देख लो वे कभी भी चुनावी रैलियों में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की तस्वीर नहीं दिखाते थे। लेकिन जब बसपा-सपा गठबंधन ने उन्हें हराया, तो उन्होंने बाबा साहेब की तस्वीरें दिखाना शुरू कर दिया।" यह कमेंट इनडायरेक्टली मायावती और भाजपा दोनों पर था।

वंदे मातरम् हमें ऊर्जा देता है: अखिलेश

वंदे मातरम की ताकत को याद करते हुए अखिलेश ने कहा, "यह कोई दिखावे या पॉलिटिक्स की बात नहीं है। इस गाने ने अंग्रेजों को भगाने में मदद की थी। यह आज भी हमें एनर्जी देता है। लेकिन कुछ लोग इसे बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।"

कन्नौज सांसद अखिलेश यादव के भाषण के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसदों ने सपोर्ट में अपनी मेजें थपथपाईं, जबकि रूलिंग पार्टी के कुछ सदस्यों ने विरोध भी किया। सदन में बहस तब शुरू हुई जब कुछ सदस्यों ने वंदे मातरम को नेशनल सॉन्ग के तौर पर ज़्यादा सम्मान देने की मांग की।

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