इसरो सैटेलाइट। इमेज-सोशल मीडिया
ISRO PSLV C62 launching: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की साल 2026 की पहली लॉन्चिंग आज सतीश धवन स्पेस स्टेशन श्रीहरिकोटा से होनी है। इस लॉन्चिंग के साथ इसरो अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाएगा। PSLV रॉकेट C-62 मिशन की लॉन्चिंग के माध्यम से भारत DRDO द्वारा विकसित किया गया एक ऐसा सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजेगा, जिसकी दिव्य दृष्टि से न चीन की चाल छिपेगी और न ही पाकिस्तान के आतंकी। दुश्मन के बंकर हो या जंगलों में झाड़ियों के पीछे छिपने आतंकियों का सेफहाउस, 600 किमी की ऊंचाई से यह सैटेलाइट सब कुछ कैद कर लेगा।
इस सैटेलाइट का नाम EOS-N1 (अन्वेषा) है, जिसे दिव्य दृष्टि या हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट के रूप में जाना जाता है। यह सैटेलाइट न केवल पर्यावरण निगरानी में नई क्रांति लाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को और अधिक मजबूत करेगा। इससे पाकिस्तान के आतंकवादियों की छिपने की कोशिशें और चीन की सीमा पर चालें भी बेनकाब होंगी। इसरो के एक अधिकारी के अनुसार इस मिशन का मुख्य पेलोड ईओएस-एन1 है, जो रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा रणनीतिक उद्देश्यों के लिए निर्मित एक इमेजिंग उपग्रह है।
जानकार बताते हैं कि DRDO द्वारा विकसित अन्वेषा उपग्रह इस मिशन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस यह उपग्रह भारत के निगरानी ढांचे को मजबूत करेगा। रक्षा और रणनीतिक योजना के लिए वास्तविक समय की खुफिया जानकारी प्रदान करेगा। भू-राजनीतिक तनाव के इस दौर में, यह संपत्ति भारत की प्रतिरोधक क्षमता को और भी मजबूत करेगी।
PSLV-C62 will carry EOS-N1 and 15 co-passenger satellites. EOS-N1 and 14 co-passengers are planned for injection into Sun Synchronous Orbit; the KID capsule is planned for a re-entry trajectory. 🗓️ 12 Jan 2026 | 🕘 09:45 IST onwards
🚀 Liftoff at 10:18:30 IST Livestream link:… pic.twitter.com/PZrd1CpgR8 — ISRO (@isro) January 11, 2026
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PSLV रॉकेट C-62 मिशन की लॉन्चिंग के लिए उल्टी गिनती शुरू है। इस साल के पहले मिशन के माध्यम से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह के साथ 14 अन्य सह उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसरो की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के लिए भेजे जा रहे इस मिशन में 14 घरेलू और विदेशी उपग्रहों को कक्ष में स्थापित किया जाएगा।
इसरो ने बताया है कि पीएस4 चरण और केआईडी कैप्सूल दोनों पृथ्वी के वायुमंडल में फिर से प्रवेश करेंगे। दक्षिण प्रशांत महासागर में उतरेंगे। भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने पीएसएलवी के माध्यम से अब तक 63 मिशन को पूरा किया है, जिनमें महत्वाकांक्षी चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 मिशन शामिल हैं।